हाँ, यह बात पूरी तरह से सत्य है। हमारे कर्म ही हमारे जीवन में सुख और दुख का कारण बनते हैं। जो भी हम आज करते हैं, उसका परिणाम हमें भविष्य में किसी न किसी रूप में मिलता है।
भगवद गीता में भी कहा गया है: "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।" अर्थात्, हमें सिर्फ अपने कर्मों पर अधिकार है, लेकिन उनके फल पर नहीं।
अगर हम अच्छे कर्म करेंगे—ईमानदारी, दया, परोपकार और मेहनत—तो हमें सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, जो सुखद होंगे। लेकिन अगर हम बुरे कर्म करेंगे—अत्याचार, छल-कपट, आलस्य—तो उनका परिणाम दुखद होगा।
इसलिए, हमें हमेशा अच्छे और सही कर्म करने चाहिए, क्योंकि यही हमारे जीवन की दिशा और दशा तय करते हैं।
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हाँ, यह बात पूरी तरह से सत्य है। हमारे कर्म ही हमारे जीवन में सुख और दुख का कारण बनते हैं। जो भी हम आज करते हैं, उसका परिणाम हमें भविष्य में किसी न किसी रूप में मिलता है।
भगवद गीता में भी कहा गया है:
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।"
अर्थात्, हमें सिर्फ अपने कर्मों पर अधिकार है, लेकिन उनके फल पर नहीं।
अगर हम अच्छे कर्म करेंगे—ईमानदारी, दया, परोपकार और मेहनत—तो हमें सकारात्मक परिणाम मिलेंगे, जो सुखद होंगे। लेकिन अगर हम बुरे कर्म करेंगे—अत्याचार, छल-कपट, आलस्य—तो उनका परिणाम दुखद होगा।
इसलिए, हमें हमेशा अच्छे और सही कर्म करने चाहिए, क्योंकि यही हमारे जीवन की दिशा और दशा तय करते हैं।
11 months ago | [YT] | 1
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big loss holding position...
1 year ago | [YT] | 0
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