“We take films, quotes, human behaviour and real-life events and uncover the hidden meaning behind them.
This channel blends philosophy, psychology & existential insight, to help people understand themselves, society and the human mind in a deeper way.
Philosopher Nitesh
1. Dosto kya mai abhi jis tareeke ke shorts videos bana raha hu, kya apko pasand a raha hai?
Aur agar koi sujhaw aap dena chahe to plese dijiye taki mai aur jayda sudhar kar saku.
2. Aur kis kis topics par aap chahte hai ki mai videos banau?
Aapke feedback ka besabri se intjar hai...👏😌
3 months ago | [YT] | 5
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Philosopher Nitesh
"I think in love, a man doesn't look at his partner with the eyes of society, but looks at her with his own approach. He doesn't hesitate to walk away on the road hand in hand, when he or she isn't affected by thoughts like 'how do you look' or 'what will people say if we go together'. In love, a man or woman looks at their partner with their own approach, they like their partner because they feel a deep emotion for each other, and that emotion is much stronger than their societal ego, because love is a state beyond ego."
मुझे लगता है कि प्यार में इंसान अपने साथी को समाज की नज़रों से नहीं, बल्कि अपने नज़रिए से देखता है। वो एक-दूसरे का हाथ थामकर सड़क पर चलने से भी नहीं हिचकिचाता, जब उसे इस बात की परवाह नहीं होती कि तुम कैसे दिखते हो या कैसे बोलते हो और जब मैं तुम्हारे साथ चलूँगा तो लोग क्या कहेंगे। प्यार में एक पुरुष या महिला अपने साथी को अपने नज़रिए से देखता है। वो अपने साथी को इसलिए पसंद करता है क्योंकि वो एक-दूसरे के लिए गहरी भावनाएँ महसूस करता है, और ये भावनाएँ उसके सामाजिक अहंकार से कहीं ज़्यादा सचेत होती हैं, क्योंकि प्यार अहंकार से परे की अवस्था है...
@philosphernitesh
3 months ago | [YT] | 4
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Philosopher Nitesh
Live aya jaay kya dosto? Aap logo se baat krne ka kafi man hai. Agar apke kuch sawal hai to plese comment box me mention kijiye.
4 months ago | [YT] | 4
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Philosopher Nitesh
New Video:- please checkout
Link:- https://youtu.be/Mw-duShpJrg
10 months ago | [YT] | 6
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Philosopher Nitesh
मुझे आप सब से कुछ जरूरी बातें करनी हैं!
तो क्या मुझे YouTube live आना चाहिए? 🙏
11 months ago | [YT] | 2
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Philosopher Nitesh
Hii dosto.. Checkout this video.
👉 https://youtu.be/b2ZhF8stMUE
11 months ago | [YT] | 5
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Philosopher Nitesh
Aapke Kuchh suggestions ki vjh se maine next vdo "Sadhguru" Par banana tay kiya hai! So mai chahta hu ki aap mujhe btaye. Ki mai is video me kya cover kru? Jaise
1. Sadguru ki life journey kaise vo enlightenment tk pahuche?
2. Sadguru ki philosophy, unki teachings, and unki personality ke bare me?
3. Sadhguru ke uniqness k bare me. Privious mystics se compair krte hue?
4. Sadhguru ke modern spiritual revolution ke bare me?
5. ?
In me se aap select krke comment kre ya aap apna topic related opinion share kre! 😊😊
Thanku so much. 🥰👏
1 year ago | [YT] | 8
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Philosopher Nitesh
किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार किसी का दर्द ले सके तो ले उधार किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है। अगर कोई आपसे पूछे की आपके पास सबसे बहुमूल्य चीज क्या है? तो आप क्या कहेंगे? मैं तो कहूंगा जीवन! आपके पास आपका जीवन है क्या ये कम है? जिसे बचाने के लिए आप अपना सर्वस्व निछावर करने को तैयार हो जाते हैं। इसलिए आपके खुश रहने के लिए यह सबसे बड़े कारण के रूप में होना चाहिए की आप जिंदा हैं।
लेकिन क्या यही जिंदा होना ही जीवन है? नही! वैसे तो आपने ना जाने कितने साल बीता दिए होंगे, लेकिन पूछने पर आपको मामूली से पल याद होंगे। आपके बीते हुए जीवन के। शायद कोई बहुत ही खुशनुमा पल या गम से भरा। क्योंकि आपने उसे जिया है, और इसलिए आप उन्हें कभी नही भुला पाएंगे। असल में जिसे जिया गया है वही यादें हैं।
वरना बाकी की जिंदगी काटी हुई जिंदगी है न की जी हुई। लोग तरह तरह की बातें करते हैं की अपने एक एक पल को जियो, पर क्या यह संभव है? हां बिलकुल बस आपको यह तय करना होगा की मुझे हमेशा खुश रहना है। और प्रेम से भरा हुआ रहना है। बस मेरी जिंदगी का एक ही मकसद है, बगैर उम्मीदों के प्रेम बांटना। बिलकुल फूल जैसा बन जाना, फिर सुगंध तो अपनेआप फैलेगी।।
इसके लिए हमे अकेले खुद के साथ जीना सीखना होगा। नही तो आजकल हम गुलाम हो चुके हैं। आदतों के लोगों के या कहें फोन के उसके बगैर बिलकुल बेचैनी अनुभव करते हैं। पर खुद के साथ आप एक बेहतरीन जीवन जी सकते हैं। इसकी शुरुवात ऐसे करें, कभी आप किसी खिले हुए फूल के पास बैठना, और निहारना उसकी पूरी खूबसूरती को। उसे पानी देना। या कहें कभी किसी पेड़ से दोस्ती कर पाना तो करना। आपके घर के आसपास रहने वाले जीवों से उनसे बातें करना उनको कुछ देना। सुकून जैसे खाना पानी या प्रेम तुम बहुत ही आश्चर्यचकित होगे जब वे तुम्हारे पास आयेंगे। जब उनमें तुम्हारा भय खत्म होने लगेगा। जब वे तुम्हारा प्रेम समझने लगेंगे। कभी तुम जाना अपने खेत में और वहां बिलकुल शांत हो जाना और फिर खुद को छू कर गुजर रही हवाओं को महसूस करना, कभी नंगे पैर चलना ओस की बूंदों पर और महसूस करना उनके हर एक स्पर्श को। बस आपको अपनी जागरूकता को बढ़ाना है। अपने अंदर प्रेम का एक सागर भरना है। और बहा देना है बाहर एक निःस्वार्थ की धार , जब जीवन दूसरों के लिए जीना, दूसरों के बगैर आ जाए तो वहीं से जिंदगी खूबसूरत होना शुरू हो जाती है।..
🙏😌💐
1 year ago | [YT] | 15
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Philosopher Nitesh
Learning from 2023
1) helth is welth. मैने इस टाइटल का एक निबंध आज से लगभग 10 साल पहले पढ़ा था तब मुझे ये जरा सा भी समझ नही आया था। But 2023 में जब मैं बीमार हुआ और काफी टाइम तक बीमार रहा तब मुझे स्वास्थ्य की कीमत पता चली। हालांकि मैं स्वास्थ्य को फ्री समझ रहा था लेकिन ये बहुत कीमती है। इससे ज्यादा कीमती कुछ भी नही है। लाइफ में सब कुछ खराब हो जाय वो बाद में बन जायेगा लेकिन स्वास्थ्य को कभी भी खराब मत होने देना।
2) Egnorence. इसको हिंदी में अज्ञान कहते हैं। लेकिन इसका एक बहुत ही deep meaning है। अनदेखा करना अपनी परेशानियों को या साथ ही उन चीजों को जिन्हे करना बेहद जरूरी है। किसी को जब कोई मर्ज होती है वह चाहे कितनी भी खतरनाक क्यों न हो अगर उसे उसके पैदा होते टाइम ही हम उसके solution पर लग जाते तो वो ठीक हो जाती लेकिन हम उसे कल पर टालते हैं। और फिर एक दिन वही चीज हमारे लिए काल बन जाती है। कबीर दास का वो दोहा मैने बहुत पढ़ा था बट समझ नही पाया था इस साल समझा "काल करे सो आज कर आज करे सो अब " अगर आपको कोई थोड़ी सी समस्या है तो उसे तुरंत सॉल्व करो ना की उसे कल पर टालो। इमिडिएट एक्शन लेने की आदत डालो
3) Happiness.. खुशी! यही तो वो चीज है जिसके पीछे इंसान पागल है। इसी के पीछे वो दौड़ रहा है लेकिन उसे ये नही पता की आखिर वास्तविक खुशी है कहां? इसी की वजह से तो हम अपनी जिंदगी बर्बाद करते हैं। कभी लगता है ये मिल गया या मैं ये हो गया या अगर ऐसा हो गया तो मैं खुश हो जाऊंगा बट सोचने से ही चीजें थोड़ी हो जाती है। काम करना पड़ता है मेहनत करना पड़ता है। बट मेहनत करने से क्या मिलता है? कष्ट। वो तो हमे चाहिए नही। फिर कहां से पाओगे वो सारी चीजें जिनसे तुम खुश होगे। नही जितना ज्यादा खुशी चाहोगे अगर उतना दर्द सहने की क्षमता होगी तभी वो सब हासिल कर सकोगे नही तो नही। यही सच्चाई है। खुशी कहां है पता है । दर्द सहने के साहस में। मौत से लड़ जाने के साहस में। कठनाइयों से लड़ जाने के साहस में। साहस आयेगा शक्ति से। शारीरिक और मानसिक दोनों शक्ति पैदा करो। अच्छा सात्विक खान पान और योग और ध्यान से ही मिलेगा ये। थोथी बकवास वा रील्स देखकर नही। सोकर नही....
4) Love.... प्रेम है जीवन का डोपमाइन हार्मोंस इसके बगैर जीवन फीका है। अगर किसी से पूछो की दुनिया की सबसे पवित्र और शक्तिशाली चीज क्या है? जो भगवान का स्वरूप है? लोग कहेंगे प्रेम। लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें लगता है की प्रेम तो कोई भी कर सकता है हर रह चलता व्यक्ति प्रेम कर सकता है। अगर कोई नफरत करने की बात करे तो मैं मान सकता हूं। नफरत, पाप, हिंसा फैलाना आसान काम है। बहुत सारे लोगों ने किया है। बहुत युद्ध और आतंकी हमले हुए है। लेकिन बात अगर प्रेम फैलाने की हो तो इक्का दुक्का नाम ही आते हैं। रहे होंगे कोई कृष्ण । लेकिन हमें लगता है प्रेम करना तो बहुत आसान है किसी लड़की या लड़के को चाहना ही तो है। उसके लिए अपनी जान देने को तैयार हो जाओ यही है प्यार। नही ये पागलपन है। प्यार किसी दूसरे इंसान के संबंध में नही है। प्यार तब होता है जब कोई इंसान अकेले एकांत में भी बहुत आनंदित हो जब उसकी खुशी केवल उसी पर निर्भर हो न की किसी और पर तब वह इंसान प्रेम के एक दीपक की तरह हो जाता है। जो भी उसकी किरणों के दायरे में आता है प्रकाशित हो जाता है। वह चाहे कोई भी हो लेकिन आज का प्रेम, केवल उसके प्रेमी के लिए है। बाकी दुनिया के लिए वह यमराज है। नही वह प्रेम नही वासना है। या कोई मानसिक विछिप्तता। तो प्यार करो मत प्यार बहाओ और यह आपका स्वभाव होना चाहिए यह किसी और पर निर्भर नही होना चाहिए। आप जीवन में जो कुछ भी करें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता! आप किसी विशेष फील्ड में बहुत ज्यादा क्रिएटिव हो सकते हैं लेकिन प्यार करने से ज्यादा क्रिएटिव कुछ बही नही है। हर किसी को प्यार करना और प्यार बिखेरना जरूर आना चाहिए यही जीवन जीने का सबसे अधिक कलात्मक तरीका है।
🌼🌼 नववर्ष की शुभकामनाएं। 😊🌼🌼
2 years ago (edited) | [YT] | 15
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Philosopher Nitesh
हम सूर्य को देखे, हम चांद को देखे, हम नदियों को देखें, हवाओं को देखे सब कुछ गतिशील है, यह पूरा ब्रम्हांड ही गतिशील है, और इस गति को देखने के लिए जब हम इंसानों में झांकते हैं तो पाते हैं की इंसानी जीवन भी एक दौड़ है, तृप्ति की दौड़। शारीरिक रूप से अगर हम देखे तो उसके दौड़ को प्रत्यक्षतः देख सकते हैं लेकिन आगे हम उसके मन में झांके तो हम उसके मन में भी एक दौड़ पाते हैं। शायद ये मन की ही दौड़ है, जो शारिरिक रूप में, गति दिखाई देने का कारण है, शरीर मन के अनुसार ही तो सबकुछ करता है।
आप जो कुछ भी प्रकृति में देखते है, महसूस करते हैं। जो कुछ भी प्रकृति में दिखता है बिलकुल उसी तरह इंसानी जीवन भी कार्य करता है। हम खुद से एक सवाल करते है। की ये दौड़ आखिर है क्यू? क्या ये दौड़ तृप्ति पाने के लिए है? हम ये तो कह सकते है। की तृप्ति ही मंजिल हैं। तृप्ति के बाद दौड़ समाप्त हो जाती है। लेकिन क्या तृप्ति स्थाई है? अगर हां तो फिर हमारी दौड़ तो समाप्त हो जानी चाहिए थी। प्यास बुझ जाने के बाद हमे फिर प्यास क्यू लगती है? भूख मिट जाने के बाद पुनः भूख क्यु लगती है? अब तक तो नदियों को रुक जाना चाहिए था, वो तो सागर तक कब का पहुंच चुकी थी। या कहे उनका एक छोर सागर में ही है। या कहे वह स्वयं सागर है। अब तक तो हवाओं को ठहर जाना चाहिए था। अब तक पृथ्वी को ठहर जाना चाहिए था। नही पूरा ब्रम्हांड वर्तुलाकार है। आप कुछ भी देखें। एक परमाणु की सरंचना से लेकर सूर्य और महासूर्यों तक ।
आप अपने जीवन पर आगे गौर करें तो आप पाएंगे की आप हर सुख जिसे की आप जी चुके हैं, उसकी पुनरावृत्ति चाहते हैं।
मोक्ष की अवधारणा मुझे गलत लगती है। उदाहरणतः बताया जाता है की मोक्ष का अर्थ है, बूंद का सागर से मिलन। एक परम अंत जिसके बाद कोई शुरूवात नही है। लेकिन फिर वही सागर की बूंदे ही तो भाप बनकर जलवर्षा करती हैं। जल की वही बूंद जो सागर में मिल चुकी थी फिर पृथ्वी पर इधर उधर भटकती है। और न जाने कितने संघर्षों के बाद पुनः सागर में विलीन हो पाती है।
यहां तक तो हम जान चुके की जीवन मानसिक और शारीरिक रूप से गतिशील है, और यह तृप्ति के केंद्र के चारो तरफ गति करती रहती है।
अब आइए समझते हैं की आखिर ये तृप्ति है क्या? और किसकी तृप्ति? अहम की इच्छा की पूर्ति ही तृप्ति है। हम अपने अहम को मजबूत करना चाहते हैं। हम अद्वितीय होना चाहते हैं। हम अपना अलग अस्तित्व चाहते हैं जो की संभव नहीं है। क्योंकि अहम जैसा कुछ है ही नही। यह बिलकुल ऐसा है जैसे कोई बूंद सागर से अलग अपनी एक दुनिया बसाने की सोचे। और वह खुद को H2O ना समझे कुछ और समझे। लेकिन इससे क्या होगा यह उसकी अज्ञानता का ही तो परिचय है।
अहम भाव के विपरीत है एक भाव जिसे हम प्रेम कहते हैं। जो की अहम की अनुपस्थिति में ही संभव है। शंकराचार्य प्रेम को अद्वैत का भाव कहेंगे यह एक सार्वभौमिक भाव है। न की पार्टिकुलर यानी व्यक्तिगत।
आश्चर्य की बात यह है की यह स्वयं के मिट जाने के बाद ही अनुभव होता है। इस भाव के लिए अहम को मिटना पड़ता है। और अहम के मिट जाने के बाद जो बचता है। वही है अस्तित्व। वही है सत्य। उसे ही कहते है प्रेम । शायद इसलिए ही बुद्ध ओशो जैसे आध्यात्मिक महापुरुषों ने परमात्मा को भाव कहा है। परम शुद्ध प्रेम का भाव।
हर कोई वही परम शुद्ध प्रेम का भाव ही है। बस संसार में आकर वह भूल जाता है। और अहम को ही स्वयं मानने लगता है। और फिर संघर्ष और दुख आदि की दौड़ शुरू हो जाती है।
और वस्तुतः हमारी वर्तुलाकार दौड़ परिधि की दौड़ है। लेकिन हमारी भूल यही है की हम केंद्र को परिधि में ढूंढ रहे हैं। और इसलिए ही हमांरी दौड़ वर्तुलाकार है। और यह कभी ना खत्म होने वाली दौड़ है।
प्रेम ही है केंद्र, और हर इंसान अपने जीवन में उसी प्रेम को ही तो खोजता है। शारीरिक जरूरतों के अतिरिक्त मनुष्य की हर दौड़ अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से उसी प्रेम को पाने की ही दौड़ है। क्योंकि वही तो हमारा असली स्वभाव है।
जैसा कि प्रेम दो टुकड़ों में बट गया हो एक स्त्री और दूसरा पुरुष। स्त्री और पुरुष की शारीरिक संरचनाओं में भी ऐसा ही दिखता है। स्त्री में एक खालीपन है तो पुरुष में एक भराव है। स्त्री पुरुष से तो पुरुष स्त्री से मिलने को व्याकुल है। जैसे एक धनायन एक ऋणायन से मिलने को व्याकुल रहता है। पुरुष अपने उस प्रेम की अभिव्यक्ति स्त्री में देखता है और स्त्री पुरुष में।
प्रेम के अनुभव के लिए स्व के भाव का मिटना आवश्यक है, तभी तो जब कोई किसी के प्रेम में होता है तो स्वयं को भूल बैठता है अहम के खोने कि झलक मिलती है।
प्रेम के बिना जीवन अधूरा है, यह सत्य है की प्रेम के बिना जीवन नीरस है, प्रेम के बिना जीना, अपने स्वभाव के बगैर जीने के जैसा है। हां जीवन की सारी दौड़ प्रेम की दौड़ है। केंद्र की दौड़ है। बस हमारी दौड़ की निरंतरता की वजह है। की हम पहुंचना तो केंद्र पर चाह रहे है परिधि के रास्ते पर चलकर। हम परिधि में केंद्र को तलाश रहे हैं। और यही हमारी अज्ञानता है। ..... 👏💐😇
@PhilosopherNitesh
2 years ago (edited) | [YT] | 32
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