Welcome to Empower with Priyanka!
Earlier, I used to share health-related content, but over time I realized my true passion is in business, growth, and motivation. That’s why I’ve changed the direction of this channel.
Now, you’ll find videos on:
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✨ Motivation to keep going in tough times
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Kya aap eggs se related recent controversy ke bare me jaante hai?? Are you aware of it??
2 months ago | [YT] | 2
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मेरा नीला स्वेटर ☺️ 🧶
कहानी शुरू करने से पहले फिर से एक रिक्वेस्ट के अगर कहानी अच्छी लगे तो इस पोस्ट को लाइक 👍 जरूर करिएगा, ताकि में ऐसी कहानियाँ और भी लिखती ✍️ रहूँ । 🥰
बात उन दिनों की है जब में हॉस्टल में पढ़ा करती थी, मेरी एक दोस्त 🤝 हुआ करती थी, आशा । बहुत सीधी साधी, बहुत प्यारी और पढ़ने में खूब तेज, वो मेरी सबसे पक्की सहेली थी, और हम दोनों एक ही कमरा 🛅 शेयर किया करते थे । पता नहीं कैसे हम दोनों पढ़ने 🙇♀️ में बिल्कुल एक जैसे थे, हम दोनों कितनी भी पढ़ाई कर लें, नंबर हमेशा एक जैसे आते थे, और दोनों में एक कम्पटीशन चलता रहता, कहीं इसके ज़्यादा नंबर ना जाए पर एक हेल्थी 🧑⚕️और अच्छा कम्पटीशन, जैसे मुझे कुछ समझ नहीं आया तो उसने समझा दिया… कभी मैंने उसे समझा दिया … इस तरह से ।
तो एक दिन ऐसे ही दिसंबर की धूप में क़रीब 12:00-12:30 बजे में मैं हॉस्टल के बगीचे में कुर्सी 🪑 लगा के बैठी थी और पढ़ रही थी । अब हम ज्यादातर ऐसे ही किया करते, अपनी कुर्सी दीवार 🚪 की तरफ़ करके बैठ जाते , जिस से हमारा ध्यान इधर उधर ना भटके । तो मेरा मुंह दीवार की तरफ़ ही था, और में आराम से बैठ कर पढ़ 🙇♀️रही थी, क्युकी लंच 🍱 ब्रेक भी होने वाला था , तो मैंने सोचा एक टॉपिक ख़त्म कर लेती हूँ ।
आशा भी आज मेरे पास ना आई थी, मैंने भी सोचा उस से पहले ये ख़त्म करना ही है , अचानक से पीछे से आकर किसी ने मेरी आँखो 👀 पर हाथ ✋ रख दिया , आप जानते ही होंगे कैसे हम अपने प्रियजनों को सरप्राइज करने के लिए पीछे से हाथ 🤚 रख देते है… बिल्कुल वैसे । मैंने एकाएक बोला - अच्छा अब तेरा टॉपिक ख़त्म हो गया तो आ गई मुझे डिस्टर्ब करने , तब पीछे से आवाज़ आई के बताओ कौन, 🤔 मैंने कुछ हॉस्टल की और लड़कियों के नाम ले दिए क्यूकी आशा तो नहीं थी आवाज़ से पता चल रहा था … और फिर हाथ हटाया —— तो में ख़ुशी के मारे ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने 🎤 लग गई — सच में मेरी ख़ुशी 😁 का ठिकाना नहीं रहा ये देख कर के पीछे मम्मी 🧑 खड़ी है । सच में में बता नहीं सकती इतनी ख़ुशी 💃मुझे हॉस्टल में कभी नहीं हुई थी । मम्मी पापा 🧑🧑🧒आए थे, हॉस्टल में मुझे मिलने । और इतना सारा सामान लाए थे में क्या ही कहूँ ।
अगर आप में से कोई हॉस्टल में रहा हो, तो वो जरूर जानते होंगे के हॉस्टल में खाने के सामान की हमेशा किल्लत 😫 ही रहती है, मतलब बिस्किट्स 🍪, नमकीन, मैगी 🍝वग़ैरा तो हमेशा चाहिए ही होता है, और मम्मी पापा भर भर के सब लाए थे और लाए थे - “मेरा प्यारा नीला स्वेटर 😍जो मुझे इतना ज़्यादा पसंद 🥰 आया था के में बता नहीं सकती, । खाना वाना तो थोड़े समय में ख़त्म जो गया, लेकिन वो नीला स्वेटर मेरे साथ पूरी सर्दियो 🌤️में मुझे गरमाता 🧣🧤रहा । और में हर समय उसी को पहने रहती 🥺| ऐसा होता है मम्मी पापा का प्यार 🥹, अचानक से उनका आना मेरे अंदर इतनी ख़ुशी भर गया और ये भी याद दिला गया के उनके जैसा प्यार और लाड़ कोई और कर ही नहीं सकता 💕।
आज सोचती हूँ जब मेरा बेटा 👦 जाएगा हॉस्टल तो उसके लिए लड्डू, मठरी, 🍪 घी, सब दे कर भेजूँगी , पता नहीं हमे उसके हॉस्टल जाने का मौक़ा मिले 🥺 या ना मिले, अगर आप में से किसी के भी बच्चे हॉस्टल में रहते हो, तो एक बार जरूर उनसे मिल कर आइए 🤝, उन्हें इतनी ख़ुशी मिलेगी 🥰 के आप सोच भी नहीं सकते । और एक माता पिता का प्यार ही है जो इन नन्हे परिंदे 🐣 (जो शायद पहली बार अपने घोंसले से बाहर निकले हो) को घर 🏡 का एहसास करता है और ये याद दिलाता है के कुछ भी हो जाए , माता पिता का हाथ 🤚 हमेशा हमारे सिर पर रहेगा । 🥰🥰🥰
मेरे हॉस्टल की एक फोटो (साथ लगी तस्वीर) - उस समय फ़ोन कैमरा नहीं हुआ करते थे, तो यही एक दो फोटो 🌠 बची है मेरी पास | (कितनी छोटी थी मैं 🥹)
2 months ago | [YT] | 7
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Kal maine apne ladoo gopal ji ke liye dress bnayi 🧶 crochet se ❤️ 🎁 cutie hai na 💖
2 months ago | [YT] | 7
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जयपुर जैसा मेरा क़िस्सा - part 2 😓
ये जो फोटो में तो आप देख सकते हो ना, ये है मेरी दीदी । और साथ ही अमाइरा की फोटो - जिसको देख कर लगता है, के इसका साथ भी कोई दीदी जैसी होती तो इसको समझती ।
इस से पहले में आगे की कहानी सुनाऊ, आप सब से रिक्वेस्ट है के आप लोग मेरी पोस्ट लाइक कर दिया करे, इस से मुझे पता लगता है के आप मेरे पोस्ट पढ़ते है, और मुझे बहुत अच्छा लगता है 😊
मेरे पैरेंट्स दोनों ही बहुत व्यस्त पैरेंट्स थे, वो ज्यादातर समय अपने काम में ही व्यस्त रहते थे, मेरी माँ भी पापा का हाथ बटाती थी तो वो भी पापा के साथ दुकान 🏬 में लगी रहती, और मम्मी 🧑 को शायद कभी पता भी ना चलता इस बात का, अगर दीदी 👩 ना बताती तो, । सोचो आज के समय में जब बच्चे खुल कर अपने पैरेंट्स से बात कर सकते है, तब भी ऐसी घटनाये हो जाती है, हमारे समय में तो बात करना मुमकिन ही नहीं था, मम्मी वैसे तो बहुत खुले विचारो की थी, मम्मी की जिद्द पर ही मुझे घर से दूर पढ़ने 📚 के लिए भेजा गया था, पर इतना मुझे पता था के अगर ऐसी बात में मम्मी को बताऊँगी तो परिणाम अच्छा तो नहीं होगा। 🙅♀️
… तो उस दिन भी ऐसा ही हुआ, मम्मी पापा दुकान पर ही थे, हमारी दुकान घर से कुछ कदम की दूरी पर ही थी, दीदी ने कब दुकान जाकर मम्मी-पापा 👨 को सब बता दिया मुझे कुछ पता ही नहीं चला । 😓 कम से काम एक बार मुझसे पूछ तो लेती के मम्मी पापा से बात करूँ या उनको शिकायत करूँ? पर नहीं - जाकर सब बता कर आ गई 🤦♀️
उसी शाम करीब 7:00-7:30 बजे होंगे, जो मैंने देखा मेरे पैरो के नीचे से ज़मीन निकल गई, 😱😱 मेरे मम्मी पापा , हमारे एक टीचर 🧑🏫- (वो मुझे पढ़ाते नहीं थे पर स्कूल में टीचर थे और पापा के जान ने वाले थे ), वहीं सरदार और उसकी मम्मी घर पर बैठक में मौजूद थे। सब बैठे थे वो सरदार लड़का खड़ा हुआ था, एक कोने में । और वो एकाएक मेरे से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगने लगा, में हक्कीबक्की रह गई - ये मेरे घर 🏡 में कहा से आ गया, अभी मुझे कुछ समझ आता इस से पहले उसकी मम्मी कहने लग गई के - इसको शर्म नहीं आती है 😡 ऐसे बच्चों को परेशान करता है- घर पे इसके पापा बीमार 🛌 पड़े है , कितनी मुश्किल से इनको पढ़ा रहे है और ये स्कूल में ऐसे ऐसे काम करता है। मेरे पापा और टीचर ने भी उसे थोड़ा धमका 😤 दिया - मुझसे पूछा गया तो में तो ज़्यादा बोल भी ना पायी, और ये ही पूछा मुझे परेशान क्यों करता है? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है 😢। तो वो और भी माफ़ी 🙏 मांगने लगा - सच्ची बताऊ तो उस समय मुझे ऐसा लग रहा था - हाए बेचारे को कितनी डाँट पड़ी मेरी वजह से । उसने मुझे कुछ कहा थोड़े ही था, मैंने ख्वामखा इसको इतना डाँट पड़वा दी, जो सच में दीदी का काम था । खैर इस घटना के बाद से उसने पूरा साल मेरी तरफ़ कभी क्लास में आँख 👀 उठा के भी नहीं देखा । और मेरी समस्या ऐसे हल हुई ।
उस समय तो दीदी पर गुस्सा 😠 आया पर एक सुकून 😌 भी मिला के शुक्र है जान छूट गई इस मुसीबत से । पर आज के समय में अगर सोच जाए तो ऐसा समय कहाँ है कि किसी के बच्चे को कुछ कहा जाए - वो किस बात की खुंदस कब हमारे बच्चे पर स्कूल में निकाल दे - कहा नहीं जा सकता - ये सब में इसलिए कह रही हूँ, आज मेरा भी बच्चा 👦 है, और में जानती हूँ के ऐसी प्रॉब्लम से निपटना कितना मुश्किल होता है, ना तो आप दूसरे के बच्चे को कुछ कह सकते हो, अपने बच्चे को समझा सकते हो, पर पता नहीं बच्चा कितना समझे या क्या समझे । जैसे अमाइरा के केस में हुआ 😓 - बच्ची परेशान जरूर थी, माता पिता ने भी कैसे हैंडल किया होगा हम नहीं जानते पर इतना जरूर जानते है के कोई भी पैरेंट्स 🧑🧑🧒 कभी भी ये नहीं सोच सकता के उनका बच्चा ऐसा कदम भी उठा लेगा । हमारे जमाने में ऐसी बातें ना के बराबर होती थी - होती थी पर इक्का दुक्का । पर आज कल समय का सच में बहुत ज़्यादा बदल गया है और इसी बदलते समय के चलते - हमे भी अपना पैरेंटिंग का तरीका बदलना होगा - ज़्यादा सावधान ‼️ होना होगा - ताकि जो हुआ वो कभी किसी के साथ दोबारा न हो ।
ऐसे ही और बहुत से किस्से है मेरे पास कुछ अच्छे, कुछ बुरे और कुछ जीवन की सच्चाई बताने वाले, अगर आपको ये पढ़ना अच्छा लगता है तो कमेंट करके जरूर बताए ☺️
2 months ago | [YT] | 11
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Hey, are you people liking my stories? I love to write ✍️ them and share with you 😍
2 months ago | [YT] | 1
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जयपुर जैसा मेरा क़िस्सा 😢
जयपुर की अमाइरा का किस्सा तो आप सभी को याद होगा , अभी ज़्यादा समय नहीं हुआ है इस केस को, पर लगता है लोग भूल गए शायद । मासूम सी बच्ची कैसे अपनी मानसिक स्थिति से लड़ती लड़ती चली गई 😢😢
मेरे साथ भी एक बार ऐसा ही हुआ था 😓, पहले तो मैंने सोचा के मैं इसका वीडियो बना कर शेयर करूँ , पर वीडियो बनाने में अजीब सा लग रहा था, पर शेयर करना जरूरी था, के शायद मेरे किस्से से किसी पेरेंट्स को सीख मिले - तो यहाँ लिख रही हूँ । साल 2002 की बात है - क़रीब 25 साल पहले की । मैं 12th क्लास में पढ़ती थी, पढ़ने में मैं ठीक ठाक थी, पर पढ़ाई के सिवा कहीं और ध्यान 🙇♀️ ना था मेरा | मेरी क्लास में एक सरदार पढ़ता था, और उसकी बहन भी पढ़ती थी, दोनों भाई-बहन एक ही क्लास में थे, क्यूंकि उसकी बहन का अलग से ग्रुप था तो मेरी उस से मामूली हेलो 👋 हाए हो जाती थी , ज़्यादा फ्रेंडशिप नहीं थी | उस समय लड़के और लड़कियों का अलग अलग से ग्रुप होते थे, co-ed स्कूल होने के बावजूद भी , लड़के लड़किया अलग अलग ही बैठाए जाते थे, और लड़के-लड़किया भी आपस में ज़्यादा घुलते मिलते नहीं थे । जैसे कि आजकल के स्कूल में लड़के लड़कियों को एक साथ बिठाया जाता है, ऐसा नहीं होता था । ऊपर से मैंने 12th में स्कूल 🏫 बदला था, तो सब बच्चे नए थे मेरे लिए, शुरू-शुरू में तो सब ठीक था, पर धीरे धीरे करीब ५-६ महीने बाद मुझे उस सरदार ने परेशान 😕 करना शुरू कर दिया, परेशान भी क्या - जैसे क्लास में अपने सब लड़के दोस्तों के साथ मिल कर मुझ पर हँसना , मेरा मजाक बनाना, पता नहीं वो मेरा मजाक बनाते थे या उसके दोस्त उसे मेरा नाम लेकर चिढ़ाते थे, मुझे नहीं पता, पर मुझे बड़ा अटपटा सा लगता, चिढ़ चढ़ती, गुस्सा भी आता, और तो और कभी कभी छुट्टी के समय ⏱️ साइकिल स्टैंड पर वो मेरी साइकिल 🚲 गिरा देता , अब धीरे धीरे हाल ऐसे हो गए के जब भी वो मुझे दिखता मेरे हाथ पांव काँपने लगते, और शर्मिंदगी लगती - क्यूंकि मुझे लगता था के ये मेरा मजाक उड़ा रहे है, 😢😢 अब मुझे स्कूल 📖 जाने से भी डर 😟 लगने लगा ।
एक दिन घर पर मैं बहुत परेशान थी,, और अपनी दीदी के पास बैठी थी,, वैसे तो मेरी और मेरी दीदी 👩 में इतनी गहरी दोस्ती नहीं थीं के मैं उसे कुछ बताती, पर उस दिन शायद मेरी दीदी ने मेरी परेशानी भांप ली, पता नहीं कैसे — उसने मुझसे पूछा - के बता तो क्या हुआ, मैंने बोला कुछ नहीं, एक लड़का परेशान 😡 कर रहा है, और मैंने दीदी को बता दिया क्या कुछ होता है मेरे साथ, पर इतने डिटेल में नहीं बताया था, (क्युकी जैसे मैंने कहा दीदी और मैं - इतने क्लोज नहीं थे उस समय पर) । अभी मैंने बस बताया ही था के दीदी ने जा कर के सब कुछ मम्मी 🧑 पापा 👨 को बता दिया 🤦♀️ - मतलब मुझे पता भी नहीं चला कब उस कम्बख़्त ने सब कुछ पैरेंट्स को बता दिया —- 😱😱😱😱 उसके बाद मेरे साथ जो हुआ उसके बारे में अभी भी सोच कर हिल जाती हूँ मैं—
आगे मेरे साथ क्या हुआ 😰 ये आपको part 2 में बताऊँगी |
2 months ago | [YT] | 5
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जब इसको पहली बार घर लाए -
लास्ट पोस्ट में आपको बताया था के कैसे इस प्यारे पिल्लू को घर लाए- और शुरू शुरू में एक तो ठंड थी , हमे भी ज़्यादा पता नहीं था, तो ये अक्सर हमारे पाँव के ऊपर बैठता था, पांव से इसको गर्माहट मिलती थी, आज भी कई बार ऐसे करता है, पर हम ज्यादातर इसको पायदान पर या इसके बिस्तर में ही रखते है, ठंड के समय । तो उस समय ठंड लगती थी तो ये रसोई में मेरे पांव के पास बैठा रहता था, मुझे भी होता था के चलो बैठा है तो बैठा रहे ☺️ मुझे भी अच्छा लगता था । अभी इसको लाए हुए कुछ ही दिन हुए थे के एक दिन ये मेरे पास रसोई में बैठा था, मैं भी खाना बना रही थी, एकाएक सब्ज़ी बनाते समय मसाले का डिब्बा मेरे हाथ से छूट गया 😱😱 और सारा मसाला नीचे गिर गया, क्युकी ये भी मेरे पैरो के पास बैठा था तो कुछ मसाला - शायद मिर्ची भी - इसकी आँखों में गिर गई, और ये बिल्कुल डर गया । और हम तीनो तो ऐसे डर गए मानो इसकी आँखे फूट गई हो , हे भगवान 😯 तब आँव देखा ना ताव, मैंने इसको गोदी में उठाया और गर्म पानी से इसकी आँखे साफ़ की, । ठंडी में रात में इसको पानी से गीला करने में दया भी आ रही थी और इसकी आँखोंका डर भी लग रहा था, । जैसे तैसे इसकी आँखे साफ़ की, और इसको अपनी रजाई में छुपाया - थोड़ा हीटर भी सेकाया । काफ़ी देर बाद जाके इसकी जान में जान आई और हमारी भी 🧖♀️ और तब जाके वो रात कटी । ऐसे कुछ और भी किस्से इस मासूम के हिस्से आए । पर ये बेजुबान सब कुछ सह गया - बस हमारे साथ रहने की खातिर 😭😭
क्या कहु 🥹 कैसे प्यार ना करूँ इस प्यारू को , जिस की सारी दुनिया हम में है, हमारी इस में 🥰🥺🥺
2 months ago | [YT] | 10
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आज आपके अपने पिल्लू 🐶- रियो की एक और घटना सुनाती हूँ,
मुझे एक रील देख कर याद आ गया, हमारा नन्हा सा रियो ४ 4️⃣ साल पहले घर आया था, एक्चुअली हम उसे अपने बेटे के जन्मदिन 🎁 पर घर लाए थे, मेरे बेटे का बहुत मन था एक पिल्लू लेने का, पतिदेव ने पहले ही बहुत चेताया था के मत लो डॉगी 🐾, हमे बहुत परेशानी होगी, ना तो कहीं जा पाएंगे, इसी के लिए घर में हर समय रहना पड़ेगा । सच्ची बताऊ तो उस समय कुछ समझ में थोड़े ना आया था - मेरे बेटे को भी और मुझे भी - घर में कुत्ता 🐕 लाने की कितनी जल्दी थी…. बता नहीं सकते । या नन्ही सी जान - अभी भी याद करती हूँ तो मन भर आता है, फरवरी की ठंड और ये छोटू सा बेबी - पिंजरे से बाहर आना चहा रहा था, पर इतना छोटा था के आ नहीं पा रहा था । हमने दुकानदार से पहले ही फ़ोन ☎️ पर बात कर ली थी , इसको लेने की - तो मानो बस ये हमारा इंतज़ार ही कर रहा था - जब इसको पहली बार चादर में बिठाया - इसकी नज़रे जैसे कह रही हो, कहा लेके जा रहे हो 🥺, मैंने इसको छोटे से गर्म टॉवल में इसको लपेट लिया, ये भी आ गया मेरे आगोश में , पर फिर भी नज़रे 🥺बिल्कुल अनजान, जैसे इसको पता हो। कोन अनजान है कौन अपना 😭 खैर इसको घर ले आए, अब आप ये जानो के हमारा जो डबल बेड है वो बॉक्स वाला है, तो उसमे नीचे घुसने की जगह नहीं है, पर ये इतना प्यारा था और इतना छोटा के - बेड के नीचे घुस जाता था, और वहाँ से इसको निकालना कितना मुश्किल होता था के क्या कहु 🤦♀️ । पर घर लाते ही इसके साथ एक इतनी बड़ी दुर्घटना हुई के हम तीनो (मैं, मेरे पतिदेव और मेरे बेटे ) की जान निकल गई - क्या जान ना चाहेंगे इस घटना के बारे में?
बताइए तो अगली पोस्ट में लिखूँगी 😍
2 months ago | [YT] | 3
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मेरे प्यारे पापा का एक प्यारा किस्सा 😍
Instagram एक ऐसी जगह हो गई है जहां आप जब भी जाएं आपको एक नया अनुभव मिलता ही है, ऐसा में क्यों कह रही हूं, क्योंकि हम मिलेमियल्स है ना... अपने समय की बातें जब याद करते हैं तो ऐसा लगता है के हम कितने बूढ़े हो गए हैं यार 😥 और इंस्टाग्राम कभी-कभी सारी यादें रील्स के रूप में आपके सामने ले आता है 😍| लेकिन आज की रील ने मुझे बहुत रुलाया 😭
अभी थोड़ी देर पहले एक वाक्य घटित हुआ - एक वीडियो देखा - जिसमें एक लड़की (कॉलेज की होगी शायद) कहीं जा रही थी - अपने हॉस्टल या कहीं - पता नहीं, पर उसके पिता जी उसे छोड़ने आए थे, बेचारे बहुत दुखी थे अपने कलेज के टुकड़े को छोड़ते समय - मुझे अपना समय याद आ गया उन्हें देख कर, जब भी मैं हॉस्टल में जाती थी ☺️ और पापा मुझे बस स्टॉप तक छोड़ने आते थे - पापा हर बार रोने 😭 लगते थे - हर बार पर पता नहीं क्यों | सब बच्चों की मां रोती है अक्सर ,, पर मेरी मां कभी नहीं रोई, पापा हमेशा रोने लगते थे, क्योंकि पापा तो बस स्टॉप तक आते थे, शायद मम्मी घर पे पीछे से थोड़ी बहुत रोती हो,, पता नहीं, पर पापा की सिर्फ आंखें ही नहीं भारी थी - वो तो बकायदा रोने लगते थे, 😭😭 मैं यही कहती थी पापा रोना नहीं, मैं जल्दी आउंगी, और ऐसे ही दुखी मन से हॉस्टल चली जाती थी,💔 सच बताऊं तो उस उम्र में बच्चों का दिल इतना लापरवाह होता है कि उन्हें उन भावनाओं की ज्यादा परवाह नहीं होती। पर अब वो वीडियो देख कर मन बार-बार रो रहा है,और मुझे ऐसा लग रहा है यार कि वो वक़्त कभी वापस नहीं आएगा और हम अपने पापा के छोटे से बच्चे कभी अपने घोंसले में वापस नहीं जा पाएंगे। 😭
मेरे प्यारे पापा 😥
www.instagram.com/reel/DRsLGcqkt64/?igsh=N3RvOGJvO…
2 months ago | [YT] | 2
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आज हमारे पिल्लू 🐶- ‘रियो’ पर बहुत गुस्सा आया, लेकिन उतना ही प्यार भी, पर दुविधा ये है के प्यार आने पर प्यार तो दिखा सकते है पर गुस्सा आने पर आप इन्हें गुस्सा कर नहीं सकते। तब ये इतने मासूम 🥺बन जाते है मानो इनसे प्यारा दुनिया में कोई है ही नहीं । खैर गुस्सा इस बात का आया के आज कल जहाँ तहाँ घर में मूत्र वीसर्जन करने लगा है । ठंड हो गई है तो जब मन करता है जहाँ मन करता है शुरू हो जाता है । सारा दिन हाथ में मॉप लिए लगा रहना पड़ता है, अरे भाई ठंड हमारे लिए भी तो आई है । पतिदेव को गुस्सा तो बहुत आता है पर इस पर जान भी सबसे ज़्यादा वही देते है, पहले गुस्सा हुए फिर कहने लगे - इसकी जर्सी लानी पड़ेगी अब 😮💨| कहते सारी जिंदगी इसी काम में निकल जाएगी - मेरा ये सुन कर मन भर आया के नहीं - ये बेचारा तो बड़ी जल्दी चला जाएगा 😢। आज जिसके लिए हम परेशान हो रहे है, कल इसी के लिए आँखे तरस जाएंगी 😭 । सच बताऊ तो शुरू-शुरू में तो बहुत परेशानी होती थी , अब तो आदत हो गई है और हाल ऐसा है के थोड़ी देर भी ये हमे ना दिखे तो हलचल होने लगती है - कुछ ऐसा ही है इन नन्हे बेजुबानों का प्यार ❤️
2 months ago | [YT] | 2
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