Author Harish Sharma

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Author Harish Sharma

Sanjeev Kumar की वजह से अनिल कपूर बन पाए एक्टर, 'शोले' के 'कंजूस' ठाकुर ने की थी लाखों की मदद।

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बॉलीवुड में अपनी झकास एक्टिंग के बलबूते पर अनिल कपूर 45 साल से ज्यादा का समय बिता चुके हैं। हालांकि, उनकी बॉलीवुड में एंट्री का पूरा श्रेय शोले के 'ठाकुर' को जाता है। कंजूस कहलाने वाले दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार की वजह से रातों-रात कैसे बदली थी अनिल कपूर की किस्मत, चलिए आपको बताते हैं।

अनिल कपूर 68 साल की उम्र में भी लगातार फिल्मों में एक्टिव हैं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 'वो 7 दिन' से की थी। उनकी पहली ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त बिजनेस किया था। अगर आज अनिल कपूर को बॉलीवुड का 'झकास' एक्टर कहा जाता है, तो इसका पूरा श्रेय संजीव कुमार को जाता है।

संजीव कुमार ही वह एक्टर थे, जिनकी वजह से अनिल कपूर को हिंदी सिनेमा में एंट्री मिली। इसका खुलासा खुद बोनी कपूर ने एक इंटरव्यू में किया था। उन्होंने बताया था कि उनके पिता प्रोड्यूसर थे, लेकिन इसके बावजूद उनके पास फिल्म बनाने के लिए पैसे नहीं थे। कैसे अनिल कपूर के लिए संजीव कुमार बने थे मसीहा।

अनिल कपूर के बड़े भाई बोनी कपूर ने एक इंटरव्यू में 'वो 7 दिन' बनाने में उन्हें किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा, इसका अनुभव शेयर किया था।

"वो 7 दिन तमिल फिल्म 'अंधा 7 नाटकल' का हिंदी रीमेक था। निर्देशक बापू इस फिल्म को तेलुगु में 'राधा कल्याणम' के नाम से बना रहे थे। तेलुगु में 'अंधा 7 नाटकल' का रीमेक बनाने से पहले जब बापू ये फिल्म देखने पहुंचे, तो मैं भी उनके साथ था और मैंने भी फिल्म देखी। उस समय ये 80 प्रतिशत ही बनी थी और अधूरी थी। डायरेक्टर भाग्यराज न जिस तरह से 'अंधा 7 नाटकल' के सभी कैरेक्टर को दर्शाया था, उसे देखकर मैंने बहुत ही पॉजिटिव रिस्पांस दिया था। मैंने तभी तय कर लिया था कि मैं फिल्म के राइट्स खरीदकर इसे हिंदी में बनाऊंगा"।

बोनी कपूर ने आगे कहा, "मैं चेन्नई गया, लेकिन मैंने देखा कि वहां पर कई प्रोड्यूसर और एक्टर खड़े हैं, जिनकी नजर भाग्यराज की फिल्म पर है। भाग्यराज उस समय के बड़े डायरेक्टर थे, इसलिए उनकी फिल्म के राइट्स खरीदने के लिए काफी भीड़ लगी हुई थी। मैं एक महीने के लिए वहां पर था और 'अंधा 7 नाटकल' की रिलीज से 2-3 दिन पहले मेकर्स को पैसों की कमी हो गई। किसी ने निर्माता को समझाया कि वह फाइनेंसर को पैसे दे देगा, लेकिन उन्हें रीमेक राइट्स मुझे देने चाहिए। उन्हें जो अमाउंट अगले दिन तक चाहिए था, वह 1 लाख 25 हजार का था, जो बहुत बड़ी रकम थी और मेरे पास इतने पैसे नहीं थे।

बोनी कपूर ने बताया कि राइट्स नहीं मिले तो वह मुंबई लौट आए, लेकिन उनके चेहरे पर एक उदासी थी, जो संजीव कुमार भांप गए थे। पैकअप के बाद, वह मेरे पास आए और उन्होंने मुझसे पूछा कि मेरा चेहरा इतना उदास क्यों है। मैंने उन्हें बताया कि क्या हुआ और सीधा कहा कि मुझे नहीं लगता कि मुझे इस फिल्म के राइट्स मिलेंगे। अगले दिन संजीव कुमार ने मुझे अपने रूम पर मिलने के लिए बुलाया"।

"मैं उनके रूम पर गया। उन्होंने मुझे कहीं पर तकिया रखा था उसे हटाने के लिए कहा। मैंने तकिया हटाया तो उसके पीछे पैसे रखे हुए थे। उन्होंने मुझसे कहा, ये 1 लाख 25 हजार रुपए हैं, इसे रखो और तुरंत मूवी के राइट्स खरीद लो। संजीव कुमार को उस समय पर लोग सबसे कंजूस एक्टर कहते थे, लेकिन उन्होंने मेरी मदद की। मैंने उनसे कहा कि मैं आपको ये पैसा इंस्टालमेंट में दे दूंगा, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि सबसे पहले जाओ और इसके राइट्स लो। शबाना आजमी ने भी मुझे 25 हजार दिए थे, तो मैंने उनके वापस कर दिए और संजीव कुमार के दिए पैसों से मैंने अंधा 7 नाटकल' के राइट्स खरीदे।

आपको बता दें कि वो 7 दिन अनिल कपूर के करियर की बेस्ट फिल्मों में से एक है, जिसे बापू ने डायरेक्टर किया था। मूवी में अनिल कपूर के साथ पद्मिनी कोल्हापुरी, नसीरुद्दीन शाह और सतीश कौशिक अहम भूमिका में थे।

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3 months ago | [YT] | 1

Author Harish Sharma

जब 7 दिनों तक अमिताभ बच्चन ने नहीं धोया अपना चेहरा, मेकअप आर्टिस्ट ने कहा था ‘आप बहुत तरक्की करेंगे’

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सदी के महानायक अमितभ बच्चन अपने काम को लेकर कितने निष्ठावान हैं यह उनके काम से बार-बार साबित हुआ है। 83 की उम्र में भी वो काम कर रहे। 50 साल से भी ज्यादा समय से काम कर रहे बिग बिग ने अपने हर किरदार के लिए काफी मेहनत की है। उन्होंने अपने किरदारों को जीया है।

अमिताभ बच्चन अपने काम के प्रति कितना निष्ठावान है यह उनसे जुड़ा एक किस्सा बखूबी से दर्शाता है। अमिताभ बच्चन ने साल 1969 में फिल्म ‘सत हिंदुस्तानी’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। उनकी यह फिल्म पूरी तरह से फ्लॉप रही थी लेकिन इस फिल्म का एक किस्सा आज भी दर्शकों को हैरान कर देता है।
बिग बी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि, इस फिल्म के लिए उन्होंने 7 दिनों तक अपना चेहरा नहीं धोया। निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास की ‘सत हिंदुस्तानी’ में अमिताभ ने बिहार के एक मुस्लिम युवक अनवर अली की भूमिका निभाई थी।

फिल्म की शूटिंग गोवा में हुई थी और बजट बहुत कम था। पंधारी जकर उस दौर के मशहूर मेकअप आर्टिस्ट थे। अमिताभ का श्रृंगार भी पंधारी करने वाले थे लेकिन अचानक किसी काम की वजह से उन्हें 7 दिनों के लिए मुंबई जाना पड़ा।
उस समय कुछ मेकअप आर्टिस्ट भी थे। इसलिए हर मेकअप आर्टिस्ट को हर लुक के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी।

मेकअप आर्टिस्ट ने जैसे ही अमिताभ को इस बारे में बताया तो उन्होंने एक बार किए गए इस मेकअप को 7 दिनों तक रखने का फैसला किया क्योंकि कोई और विकल्प नहीं था। इसलिए उन्होंने सात दिन तक अपना मुंह ही नहीं धोया।
अमिताभ ने बताया कि उन्होंने 6 दिन तक अपने चेहरे पर पानी तक नहीं लगाया। जब मेकअप आर्टिस्ट पंधारी दोबारा आए तो अमिताभ को देखकर चौंक गए। इस लुक के लिए बिग बी ने दाढ़ी रखी थी, उसी मेकअप के साथ उन्होंने 6 दिन तक सब कुछ किया- खाना, सोना।
अमिताभ बच्चन के काम के प्रति इतना निष्ठा देख पंधारी ने बिग बी से कहा था कि ‘आप बहुत तरक्की करेंगे, काम के लिए आपका प्यार आपको एक दिन सुपरस्टार बना सकता है’।

3 months ago | [YT] | 1

Author Harish Sharma

अमिताभ बच्चन की रिजेक्ट की इस फिल्म ने बना दिया था अनिल कपूर का करियर, आज भी मानी जाती है बेस्ट मूवी।

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बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में एक ऐसी फिल्म को रिजेक्ट कर दिया था जिसने बाद में अनिल कपूर को हीरो बना दिया। इसी फिल्म की वजह से एक्टर का करियर बदल गया।

अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर दोनों ही इंडस्ट्री के लीजेंड एक्टर्स में गिने जाते हैं। दोनों ही सालों से फिल्मों का हिस्सा हैं और अभी तक ऑडियंस को एंटरटेन आकर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं अनिल कपूर को अच्छा एक्टर बनाने वाली फिल्म पहले अमिताभ बच्चन करने वाले थे। लेकिन बाद में वो फिल्म अनिल को मिली और उन्होंने अपने किरदार से ऑडियंस को इम्प्रेस कर दिया। एक्टर के करियर की शानदार फिल्मों में होती है गिनती।

अमिताभ बच्चन को किया रिप्लेस
हम बात कर रहे हैं फिल्म मेरी जंग की, पहले इसका नाम शतरंज रखा गया था। इस फिल्म के लिए पहले अमिताभ बच्चन लीड हीरो थे। फिल्म में जया प्रदा लीड हीरोइन और अनिल कपूर अमरीश पुरी के बेटे के किरदार में नजर आने वाले थे। यानी नेगेटिव रोल में। उसी दौरान अमिताभ बच्चन को उस वक्त चोट लगी और उनके कई प्रोजेक्ट रुक गए। साथ ही वो राजनीति में कदम रखने की तैयारी भी कर रहे थे। इसी बीच उन्होंने ये फिल्म छोड़ दी। अमिताभ के फिल्म छोड़ते ही जया प्रदा भी प्रोजेक्ट से हट गई।

फिल्म का बदला गया नाम
इसके बाद NN सिप्पी ने इस प्रोजेक्ट को डायरेक्ट करने की जिम्मेदारी सुभाष घई को दी। घई ने स्क्रिप्ट पर काम शुरू किया और फिल्म का नाम बदलकर रख दिया मेरी जंग। लेकिन अब जरूरत थी नए हीरो की। पहले शत्रुघ्न सिन्हा से बात हुई, पर बात बनी नहीं। तभी सुभाष घई ने अनिल कपूर को फिल्म मशाल में देखा और उनकी एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें मेरी जंग का हीरो बना दिया।

अनिल कपूर का करियर
एक बार अनिल कपूर ने कहा था “अगर अमिताभ बच्चन उस फिल्म को न छोड़ते, तो शायद मुझे वो मौका कभी न मिलता।” सच भी यही है ‘मेरी जंग’ ने अनिल कपूर का करियर बदल दिया। उनके कोर्टरूम सीन, डायलॉग डिलीवरी और इमोशनल एक्टिंग ने ऑडियंस पर छाप छोड़ दी। आज भी उनके करियर की ये बेहतरीन फिल्म मानी जाती है।

3 months ago | [YT] | 1

Author Harish Sharma

वो शर्त, जिसके पूरा होने पर जया बच्चन ने साइन की थी रेखा-अमिताभ के साथ फिल्म सिलसिला, कहा था- जब सेट पर हमेशा...

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वो शर्त, जिसके पूरा होने पर जया बच्चन ने साइन की थी रेखा-अमिताभ के साथ फिल्म सिलसिला, कहा था- जब सेट पर हमेशा...फिल्म सिलसिला बॉलीवुड की यादगार फिल्मों में से एक है. इस फिल्म को इसके सितारों ने यादगार बनाया था. इस फिल्म में दर्शकों को उनकी फेवरेट ऑनस्क्रीन जोड़ी यानी अमिताभ बच्चन और रेखा को आखिरी बार साथ देखने का मौका मिला था.

फिल्म सिलसिला बॉलीवुड की यादगार फिल्मों में से एक है. इस फिल्म को इसके सितारों ने यादगार बनाया था. इस फिल्म में दर्शकों को उनकी फेवरेट ऑनस्क्रीन जोड़ी यानी अमिताभ बच्चन और रेखा को आखिरी बार साथ देखने का मौका मिला था. हालांकि फिल्म की कास्टिंग आसान नहीं थी. डायरेक्टर यश चोपड़ा को जया बच्चन को इस फिल्म के लिए राजी करना एक मुश्किल चुनौती थी. उस समय, अमिताभ और रेखा के कथित अफेयर की अफवाहें पहले से ही सुर्खियां बटोर रही थीं. फिल्म की कहानी वास्तविक जीवन से मिलती-जुलती लग रही थी, इसलिए फिल्म में जया का होना जरूरी था.

संजीव कुमार ने की यश चोपड़ा की मदद

जया को मनाने के लिए यश चोपड़ा ने संजीव कुमार की मदद ली, जिनका जया के साथ एक करीबी रिश्ता था. संजीव के जीवनी लेखक हनीफ जावेरी और उनकी भतीजी जिग्ना ने विक्की लालवानी के साथ बातचीत में कहा, "यश चोपड़ा जानते थे कि संजीव कुमार जया को अपनी बहन मानते हैं, इसलिए उन्होंने उन्हें जया को फिल्म के लिए राजी करने के लिए कहा. जया फिल्म करने के लिए तैयार हो गईं, लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी. उन्होंने कहा कि वह हमेशा सेट पर मौजूद रहेंगी, तब भी जब उनकी जरूरत न हो." हनीफ ने इस शर्त के पीछे का कारण बताया- "ज़ाहिर है, रेखा की वजह से."

अमिताभ बच्चन के बारे में क्या बोलीं रेखा

रेखा अक्सर अपने अभिनय पर अमिताभ के प्रभाव के बारे में बात करती रही हैं. फिल्मफेयर के एक इंटरव्यू में, उन्होंने कहा, "एक अभिनेत्री के रूप में मैं जो कुछ भी हूं, उसका 100 प्रतिशत श्रेय उन्हीं को जाता है. मैं बस उन्हें देखकर सीखने की कोशिश करती हूं. विडंबना यह है कि वह मेरे या किसी और के जीवन पर उनके प्रभाव से पूरी तरह अनजान थे. उनकी उपस्थिति और भावना ने ही एक अभिनेता और एक इंसान के रूप में मेरे करियर में योगदान दिया. वह मेरी अंतरात्मा की तरह हैं जो मुझे जीवन और मेरे अभिनय में मार्गदर्शन करती है."

4 months ago | [YT] | 1

Author Harish Sharma

सेंसर बोर्ड ने जताई 'जय श्री राम' पर आपत्ति, अड़ गया मुस्लिम डायरेक्टर, मूवी निकली ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर.

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बॉक्स ऑफिस पर 10 साल पहले एक ऐसी फिल्म आई जिसकी कहानी दर्शकों के जेहन में बस गई थी. फिल्म के एक सीन में मौलाना ने 'जय श्री राम' का नारा लगाया था. इस सीन पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई. फिल्म के डायरेक्टर ने भी इस सीन को फिल्म से ना निकालने की कसम खाई. लंबी लड़ाई के बाद जीत मुस्लिम डायरेक्टर की हुई. फिल्म की कहानी दिल छू लेने वाली थी. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर मूवी साबित हुई.

सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान को 10 साल पूरे हो चुके हैं. यह फिल्म 17 जुलाई 2015 में रिलीज हुई थी. फिल्म में सलमान खान से ज्यादा फोकस स्टोरी पर किया गया था. फिल्म की कहानी दिल छू लेने वाली थी. यह फिल्म सलमान खान के करियर की सबसे अच्छी फिल्मों में से एक है. बजरंगी भाईजान में सलमान खान ने पवन नाम के एक युवक का रोल निभाया था. वो एक पाकिस्तानी बच्ची को उसके घर पहुंचाने के लिए जी-जान लगा देता है. वो कई मुश्किलों को सहते हुए पाकिस्तान जाता है और बच्चों को उसके घर तक पहुंचाता है.

पाकिस्तान में उनकी मदद एक मौलाना करते हैं जिसका किरदार ओमपुरी ने निभाया था. एक सीन में मौलवी बने ओमपुरी 'जय श्री राम' का नारा लगाते हैं. मुन्नी का किरदार हर्षाली मल्होत्रा ने निभाया था. 'बजरंगी भाईजान' के इसी सीन को लेकर फिल्म के डायरेक्टर और सेंसर बोर्ड में जमकर तकरार हुई थी. इसका खुलासा फिल्म के डायरेक्टर कबीर खान ने अपने एक इंटरव्यू में किया.

डायरेक्टर कबीर खान ने बताया 'फिल्म में जब सलमान खान मुन्नी को लेकर पाकिस्तान पहुंच जाते हैं. वो छिपते-छुपाते एक मौलाना से मिलते हैं. मौलाना का रोल ओमपुरी ने निभाया था. सलमान खान मौलाना से 'खुदा हाफिज' कहकर अभिवादन करते हैं, जवाब में मौलाना पूछते हैं कि आपके यहां क्या बोलते हैं, इस पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी बोलते हैं कि इनके यहां 'जय श्री राम' बोलते हैं. इस पर ओमपुरी 'जय श्री राम' बोलकर अभिवादन का उत्तर देते हैं. वो मस्जिद के मौलाना के रोल में थे. इस सीन पर सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी.

'एक था टाइगर' डायरेक्ट कर चुके कबीर खान ने आगे बताया, 'सेंसर बोर्ड के सामने मैं भी अड़ गया और बोला कि मैं इसे कभी नहीं बदलूंगा. ये सीन तो मूवी में रहेगा ही रहेगा. और हम ये लड़ाई जीते. फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई. मैं थिएटर्स में दर्शकों का रिएक्शन देखने के लिए गया. जब वह सीन आया तो मैंने देखा कि जब ओम पुरी जो कि मौलाना के रोल में थे, जैसे ही 'जय श्री राम' बोले, पूरे थिएटर्स में जय श्री राम के नारे गूंज उठे.'

कबीर खान ने बताया कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म के टाइटल का नाम सुनते ही फिल्म देखने से इनकार कर दिया था. उनहोंने बताया, 'बहुत लंबी लड़ाई हुई. उन्होंने फिल्म का टाइटल बदलने के लिए कहा. मैंने इसका कारण पूछा. वो बोले कि हम नहीं चाहते कि देश में कोई अशांति हो. उन्होंने कहा कि या तो इसे भाईजान कर लीजिए या फिर बजरंगी. मैंने उनसे कहा कि आप यह सब लिखित में दे दीजिए.'

फिल्म में दिखाया गया था कि दोनों देशों की आम आवाम अमन-शांति चाहती है. फिल्म में दोनों देशों के बीच एक खूबसूरत रिश्ता दिखाया गया था. फिल्म में सलमान खान, करीना कपूर, हर्षाली मल्होत्रा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, शरत सक्सेना, ओम पुरी और राजेश शर्मा नजर आए थे. फिल्म का डायरेक्शन कबीर खान ने किया था. इससे पहले वह सलमान खान के साथ 'एक था टाइगर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म बना चुके थे.

बजरंगी भाईजान फिल्म की कहानी बाहुबली के डायरेक्टर एसएस राजामौली के पिता केवी. विजयेंद्र प्रसाद ने लिखी थी. वो इस फिल्म की कहानी लेकर सुपरस्टार आमिर खान के पास पहुंचे थे. आमिर खान ने कहानी सुनने के बाद उनसे इस फिल्म में सलमान खान को लेने की सलाह दी थी. आमिर खान ने हाल ही दिए इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था. हालांकि केवी प्रसाद फिल्म की कहानी लेकर सीधे कबीर खान से मिले. कबीर खान ने आगे चलकर सलमान खान को फिल्म की स्टोरी सुनाई. फिल्म का प्रोडक्शन कबीर खान और सलमान खान ने किया था. म्यूजिक प्रीतम का था. फिल्म में कुल 11 गाने रखे गए थे.

बजरंगी भाईजान फिल्म का बजट करीब 125 करोड़ रुपये का रखा गया था. फिल्म ने इंडिया में 444 करोड़ का जबकि वर्ल्ड वाइड 900 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. भारत के अलावा पाकिस्तान में भी इस फिल्म ने करीब 54 करोड़ की कमाई की थी.

4 months ago | [YT] | 0

Author Harish Sharma

साढ़े 4 साल रिजेक्ट होती रही स्क्रिप्ट, इस हीरो ने हाथ जोड़ मांगी फिल्म, 300 Cr की कमाई के साथ जीते 11 अवॉर्ड.

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बॉलीवुड इंडस्ट्री में साढ़े चार साल तक स्क्रिप्ट घूमती रही. कई एक्टर्स ने फिल्म को रिजेक्ट किया. इसके बाद एक सुपरस्टार ने हाथ जोड़कर फिल्म मांगी और उसमें काम किया. रिलीज के बाद मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया था.
कई बार फिल्मों की कहानियां ऐसी होती हैं, जिनमें एक्टर्स काम करने की दिलचस्प नहीं दिखाते. ऐसी ही एक मूवी 8 साल पहले रिलीज हुई थी, जिसमें कोई भी काम नहीं करना चाहता था. मगर एक हीरो ने हाथ जोड़कर फिल्म मांगी और फिर उसमें काम किया है. उस फिल्म का नाम है 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा'

साल 2017 में 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' फिल्म रिलीज हुई थी. इसमें अक्षय कुमार लीड रोल में थे. वहीं, भूमि पेडनेकर उनके अपोडिट नजर आई थीं. अनुपम खेर, दिव्येंदु शर्मा, सचिन खेडकर और राजेश शर्मा जैसे सितारे भी फिल्म का हिस्सा थे. इस मूवी का डायरेक्शन श्रीनारायण सिंह ने किया था.

इस फिल्म की कहानी ग्रामीण इलाकों में शौचालयों की जरूरत और उसकी कमी से होने वाली समस्याओं उजागर करती है. इसके साथ ही मूवी में एक लव स्टोरी के जरिए इसे रोचक तरीके से बताया गया है. केशव (अक्षय कुमार) एक ऐसे गांव में रहता है जहां शौचालय की कमी के कारण महिलाएं खुले में शौच के लिए जाती हैं.

इस बीच केशव की शादी पढ़ी-लिखी लड़की जया (भूमि पेडनेकर) से हो जाती है. शादी के बाद जब जया को पता चलता है कि केशव के घर में शौचालय नहीं है तो उनके बीच मनमुटाव शुरू हो जाता है. केशव को यह एहसास होता है कि उसके घर में शौचायल होना चाहिए. घर में नहीं, बल्कि पूरे गांव में होना चाहिए.

आपको जानकर हैरानी होगी कि 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' में कोई भी हीरो काम नहीं करना चाहता था. यह खुलासा खुद अक्षय कुमार ने किया था. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'इस फिल्म की स्क्रिप्ट इंडस्ट्री में तकरीबन साढ़े 4 साल तक घूमती रही. कई हीरो के पास गई थी, लेकिन कोई इसमें काम नहीं करना चाहता था.'

अक्षय कुमार ने आगे कहा, 'मुझे यह मूवी अच्छी लगी, बल्कि मैंने हाथ जोड़कर नीरज पांडे से फिल्म मांगी और कहा कि मैं इसमें काम करना चाहता हूं. मैंने फिल्म की. इस मूवी का नाम शुरुआत संडास: एक प्रेम कथा थी. फिर इसे बदलकर टॉयलेट: एक प्रेम कथा की गई है. यह सच्ची कहानी पर फिल्म बनी है'.

ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' की मेकिंग पर 18 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. भारत में मूवी ने 186.42 करोड रुपये का ग्रोस कलेक्शन किया था. वर्ल्डवाइड कमाई 316.97 करोड़ रुपये हुई थी.

यह फिल्म बॉक्स ऑफिस ना सिर्फ सुपरहिट साबित हुई, बल्कि लगभग 1 दर्जन अवॉर्ड भी जीत लिए थे. आईएमडीबी के मुताबिक, 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' ने 11 अवॉर्ड अपने नाम कर लिए थे. इन दिनो यह फिल्म जी5 पर अवेलेबल है. आईएमडीबी पर मूवी को 10 में से 7.2 रेटिंग मिली है.

4 months ago | [YT] | 2

Author Harish Sharma

महज एक शॉट के लिए हीरो ने तोड़ी थी अपनी लग्जरी कार, 45 साल बाद भी इस आइकॉनिक सीन को लोग करते हैं याद
हर डायरेक्टर और एक्टर की चाह होती है कि उसकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तगड़ा कलेक्शन करें, जिसके लिए वो फिल्म में कई प्रकार के ट्विस्ट और सीन में बदलाव करते हैं. लेकिन आज हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं उन्होंने फिल्म के सिर्फ एक सीन के लिए अपनी लग्जरी कार तोड़ दी थी.

कई एक्टर और डायरेक्टर फिल्म को इनोवेटिव बनाने के लिए उसकी कहानी, कास्ट, सीन या लोकेशन को चेंज करते हैं और लाखों पैसा पर खर्च करते हैं. मगर आज हम आपको एक ऐसे एक्टर-डायरेक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी फिल्म के महज एक शॉट के लिए खुद की मर्सिडीज कार की कुर्बानी दे दी थी. इस बात को सुनकर आप चौंक गए होंगे मगर ये कोई अफवाह नहीं बल्कि सच्ची घटना है.

आज हम जिस एक्टर की फिल्म का किस्सा सुना रहे हैं वो फिरोज खान है. उन्होंने साल 1980 में फिल्म 'कुर्बानी' को डायरेक्ट किया था. इस फिल्म में फिरोज खान के अलावा विनोद खन्ना और एक्ट्रेस जीनत अमान दिखाई दी थी. इन तीनों की जोड़ी ने बड़े पर्दे पर कमाल कर दिया था.

इस फिल्म को लेकर फिरोज खान काफी सीरियस थे और वो किसी भी कीमत पर इसे सुपरहिट बनाना चाहते थे, उनके इस जुनून के चलते उन्हें अपनी ही लग्जरी कार की कुर्बानी देना पड़ी थी.

दरअसल फिल्म में अमरीश पुरी के साथ एक फाइटिंग सीन शूट करना था जिसे यादगार बनाने और बेहतरीन सीन पेश करने के लिए फिरोज ने अपनी लग्जरी कार मर्सिडीज को तोड़ने का फैसला कर लिया था. जिसे सुनकर सेट पर सभी लोग हैरान रह गए थे.

थिएटर में फिल्म को देखने के बाद ऑडियंस ने सबसे ज्यादा तालियां और सीटियां उसी सीन पर बजाई थीं और इस आइकॉनिक सीन को आज तक याद किया जाता है. फिल्म 'कुर्बानी' को महज 2 करोड़ में बनाया गया था. लेकिन फिरोज खान के कमाल के डायरेक्शन और विनोद खन्ना के साथ जीनत अमान की केमिस्ट्री ने इस फिल्म को सुपरहिट बना दिया था और फिल्म ने लगभग 25 करोड़ की कमाई की थी.

इस क्लासिक फिल्म के कई गाने आज भी लोगों के जुबां पर बैठे हैं जिसमें 'आप जैसा कोई' सॉन्ग बहुत हिट हुआ था और ये आज भी लोगों की प्ले लिस्ट में शामिल है. वहीं इस फिल्म में जीनत अमान के लुक्स और ड्रेसिंग स्टाइल की भी खूब चर्चा हुई थी.

4 months ago | [YT] | 1

Author Harish Sharma

Namak Haraam: अमिताभ बच्चन से चालाकी जब राजेश खन्ना को पड़ी थी भारी, एक पल में छिन गया था स्टारडम।

साल 1973 में रिलीज हुई नमक हराम का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म की रिलीज के बाद अमिताभ की किस्मत चमकी थी और पहली बार सभी का ध्यान लीड हीरो से हटकर सपोर्टिंग एक्टर पर गया था।

1973, अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के लिए सबसे शानदार साल और राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) के स्टारडम की दीवार चटकने लगी। किसे पता था, हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की लाइमलाइट बिग बी बटोर लेंगे।

यह सिलसिला शुरू हुआ ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म नमक हराम (Namak Haraam) से। आनंद बनाने के बाद फिल्ममेकर एक बार फिर बड़े पर्दे पर राजेश और अमिताभ को साथ लेकर आए। यह पिल्म 1964 में आई हॉलीवुड क्लासिक बेकेट (Becket) की हिंदी रीमेक थी।


नमक हराम में जमी थी राजेश-अमिताभ की जोड़ी
लीड रोल में उस वक्त के सुपरस्टार रहे राजेश खन्ना थे और अमिताभ बच्चन सपोर्टिंग रोल में थे। कहानी कुछ ऐसी थी कि सोमू (राजेश) एक गरीब और आदर्शवादी किस्म का था और कमजोर के लिए लड़ता था। दूसरी ओर विक्की (अमिताभ) एक अमीरजादा अहंकारी था जिसके मिल में सोमू काम करता है। बेकेट के क्लाइमेक्स में था कि विक्की के कैरेक्टर की मौत हो जाती है लेकिन नमक हराम का क्लाईमेक्स एकदम अलग था।

राजेश खन्ना ने चेंज करवाया था क्लाइमेक्स
जब नमक हराम बन रही थी, उस वक्त राजेश एक सुपरस्टार थे और अमिताभ बच्चन को फ्लॉप स्टार माना जाता था। हालांकि, आनंद के बाद उनके पास कई बड़ी फिल्में थीं जिनसे उनकी किस्मत चमकने वाली थी। जब फिल्म बन रही थी, तब ऋषिकेश ने फिल्म का क्लाइमेक्स सीन अमिताभ को नहीं बताया था। ऐसा इसलिए क्योंकि राजेश ने उनसे क्लाइमेक्स चेंज करवा दिया था।

अमिताभ बच्चन को लगा था बुरा
यासीर उस्मान के मुताबिक, राजेश खन्ना चाहते थे कि क्लाइमेक्स में उनका डेथ सीन हो, क्योंकि वह हीरो हैं। लाख समझाने के बावजूद वह नहीं माने तो फिल्ममेकर को चेंज करना ही पड़ा। जब यह सीन फिल्माने गए, तब जाकर अमिताभ बच्चन को इसका पता चला और वह बहुत नाराज हुए। उन्होंने कई दिनों तक तो ऋषिकेश से तो बात भी नहीं की थी। उन्हें लगा कि डायरेक्टर ने उन्हें धोखा दिया है।

अमिताभ बच्चन का उड़ा था मजाक
फिल्म की शूटिंग लगभग खत्म हुई और यह सिनेमाघरों में उतरने से पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिखाई गई। उस वक्त तक अभिनेता एक फ्लॉप एक्टर में गिने जाते थे। ऐसे में सपोर्टिंग रोल में अमिताभ बच्चन का किरदार देख लोगों को लगा कि वह हीरो हैं और राजेश का स्पेशल अपीयरेंस है। उन्होंने अमिताभ के हेयरस्टाइल का भी मजाक उड़ाया।
अमिताभ बच्चन बन गए थे स्टार
इसके बाद जंजीर मूवी रिलीज हुई और अमिताभ रातोंरात स्टार बन गए। उस वक्त डिस्ट्रीब्यूटर्स फी उनकी फिल्मों के लिए बेताब हो गए। उन्होंने यहां तक कहा कि अमिताभ का सीन बढ़ाया जाए। फिल्म रिलीज से पहले वह सिर्फ एक को-स्टार थे, लेकिन नमक हराम आने के बाद राजेश खन्ना पर भी भारी पड़ गए।

5 months ago | [YT] | 2

Author Harish Sharma

New Hindi book published and available in both formats. Paperback and E-book.

ट्रैप / Trap

Paperback on pothi

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ट्रैप / Trap - एक अनजान धोखा..

“ट्रैप...! कुछ ऐसे लोगों को किसी रहस्यमयी स्थान पर ट्रैप किया गया, जो एक दूसरे से अनजान थे! सभी एक ऐसी जगह पर कैद हैं! जहाँ से बाहर निकलने के लिए उन्हें खुद ही अपना दिमाग लगाना है। पर किसी ने उनके साथ ऐसा क्यों किया? यह उनमें से कोई नहीं जानता! पर जानना सभी चाहते हैं! उन्हें एक जगह कैद करने वाला कौन था? और वह उनसे क्या चाहता था? क्या वे खुद को बचा पाए? और इन सब के पीछे का कारण क्या था? उन सभी को एक साथ ट्रैप करने वाला कौन था? उनमें से कोई एक! या कोई और?”

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5 months ago | [YT] | 1

Author Harish Sharma

50 हफ्तों तक थिएटर्स में चली थी Manoj Kumar की देशभक्ति फिल्म, 23 साल तक कायम रहा रिकॉर्ड।

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देशभक्ति फिल्मों के चलन का अधिक श्रेय दिवंगत अभिनेता मनोज कुमार (Manoj Kumar) को जाता है। मनोज ने अपने करियर में भारत की शान बढ़ाने वालीं एक से बढ़कर एक फिल्म की। इसी आधार पर हम आपको उनकी उस मूवी के बारे में बताने जा रहे हैं जो 50 हफ्तों से ज्यादा समय तक थिएटर्स में चली थी।

मनोज कुमार फिल्म जगत का वो नाम थे, जिन्होंने देशभक्ति जॉनर की मूवीज का ट्रेंड शुरू किया था। अपने करियर में मेरा भारत महान की सीख देने वाले मनोज साहब ने एक शानदार फिल्मों के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था।
इस आधार पर आज हम आपको मनोज कुमार की उस फिल्म के बारे में अहम जानकारी देने जा रहे हैं, जो करीब डेढ़ साल तक सिनेमाघरों में चली थी। उनकी इस मूवी का ये रिकॉर्ड 23 सालों तक कायम रहा था। आइए जानते हैं कि यहां कौन सी फिल्म का जिक्र किया जा रहा है।

मनोज कुमार की यादगार
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं की फेहरिस्त में मनोज कुमार का नाम हमेशा शामिल होगा। उन्होंने दुनियाभर में अपनी देशभक्ति फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा को अलग पहचान दिलाई। जिसमें सबसे बड़ी भूमिका 1970 में आई पूरब और पश्चिम मूवी ने निभाई। जी हां, मनोज की यही देशभक्ति फिल्म 50 हफ्तों से ज्यादा समय तक सिनेमाघरों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती रही।

आईएमडीबी की रिपोर्ट के अनुसार 23 साल तक पूरब और पश्चिम तक कायम रहा। बाद में साल 1994 में सलमान खान की फैमिली ड्रामा फिल्म हम आपके हैं कौन ने इसका ये रिकॉर्ड तोड़ा था। गौर करें पूरब और पश्चिम की तरफ तो इस मूवी में मनोज कुमार, सायरा बानो, प्राण, निरूपा रॉय, मदन पुरी और ओम प्रकाश जैसे कलाकारों ने अहम भूमिका को अदा किया था।

फिल्म की कहानी 1942 में भारत छोड़ों आंदोलन के मद्देनजर रखी हुई है। इसमें एक स्वतंत्रता सेनानी की भूमिका का सार देखने को मिलता है, जिसे धोखा मिलता है और वह मारा जाता है। उसका बेटा भारत विदेश जाता है, पढ़ने के लिए जाता है और वहां जाकर अपने देश का गुणगान करता है। लेकिन इस मामले में उसके सामने काफी अड़चन आती है। जिससे पार पाने के लिए वह काफी उतार चढ़ाव से गुजरता है।

1970 की सबसे सफल मूवीज में हुई थी शुमार
हिंदी सिनेमा में 1970 के दशक की शुरुआत के बाद बॉक्स ऑफिस पर राजेश खन्ना की फिल्मों का बोलबाला देखने को मिल रहा था। लेकिन उनको टक्कर मनोज कुमार ने अपनी देशभक्ति फिल्म पूरब और पश्चिम से दी थी और ये मूवी 1970 की सबसे सफल मूवीज की सूची में शुमार रही। बता दें कि मनोज ने बतौर अभिनेता ही नहीं बल्कि डायरेक्टर के तौर पर भी इस मूवी की कमान संभाली थी।

6 months ago | [YT] | 2