इस संसार में पुत्र,पत्नी और प्राण से भी बढ़कर एक वस्तु है जो आत्मा या पुरुष के रूप में आपके अन्तस्तल या ह्रदयदेश में छिपी हुई है । हम सांसारिक विषयों से मन को हटा कर , इंन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर, ध्यान, तपस्या, समाधि और योग-साधना द्वारा ही अपने अंदर छिपी हुई इस दिव्य शक्ति को प्राप्त कर सकते हैं । यह सच है कि आत्मा या ब्रह्म प्रत्येक प्राणी में छिपा हुआ है, परन्तु वही इसके दर्शन कर पाता है जिनका मन शुद्ध, पवित्र और उसके पूर्ण नियंत्रण में है । जिसने मन के स्वभाव और क्रिया- पद्धति को पूर्णतया समझ लिया है,उसके लिए मनोनिग्रह बड़ा सरल है । मन को वशीभूत कर राजयोगी दर्शन,ध्यान और समाधि प्राप्त करते हैं । वेदान्तीयों को श्रवण,मनन और निदिध्यासन की आत्मिक शक्तियाँ सुलभ हो जाती हैं । भक्तगण भगवान के चरणारविन्दों के ध्यान में लीन हो जाते हैं । इस पुस्तक में मन को नियंत्रित करने के कुछ क्रियात्मक उपाय बतलाये गये हैं । इसलिए यह आत्म-साक्षात्कार के पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बड़ी सहायक सिद्ध होगी ।
Advait Anand
इस संसार में पुत्र,पत्नी और प्राण से भी बढ़कर एक वस्तु है जो आत्मा या पुरुष के रूप में आपके अन्तस्तल या ह्रदयदेश में छिपी हुई है । हम सांसारिक विषयों से मन को हटा कर , इंन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर, ध्यान, तपस्या, समाधि और योग-साधना द्वारा ही अपने अंदर छिपी हुई इस दिव्य शक्ति को प्राप्त कर सकते हैं ।
यह सच है कि आत्मा या ब्रह्म प्रत्येक प्राणी में छिपा हुआ है, परन्तु वही इसके दर्शन कर पाता है जिनका मन शुद्ध, पवित्र और उसके पूर्ण नियंत्रण में है ।
जिसने मन के स्वभाव और क्रिया- पद्धति को पूर्णतया समझ लिया है,उसके लिए मनोनिग्रह बड़ा सरल है ।
मन को वशीभूत कर राजयोगी दर्शन,ध्यान और समाधि प्राप्त करते हैं । वेदान्तीयों को श्रवण,मनन और निदिध्यासन की आत्मिक शक्तियाँ सुलभ हो जाती हैं । भक्तगण भगवान के चरणारविन्दों के ध्यान में लीन हो जाते हैं ।
इस पुस्तक में मन को नियंत्रित करने के कुछ क्रियात्मक उपाय बतलाये गये हैं । इसलिए यह आत्म-साक्षात्कार के पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बड़ी सहायक सिद्ध होगी ।
New Audio Book
1 year ago | [YT] | 8
View 0 replies