Dhruva Academy Ghumarwin

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Coordination chemistry
Werner's theory

2 years ago | [YT] | 1

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भगवान परशुराम की जन्मभूमि श्रीरेणुकाजी

श्रीरेणुकाजी झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। यह झील लगभग तीन किमी. में फैली है। इसकी खासियत यह है कि झील का आकार किसी स्त्री जैसा है। इसे मां रेणुका जी की प्रतिछाया भी माना जाता है।

इसी झील के किनारे मां श्रीरेणुकाजी व भगवान परशुरामजी के भव्य मंदिर हैं

2 years ago | [YT] | 4

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आजादी से पहले और अपनी स्थापना तक ब्रिटिश राज में इन रियासतों में बंटा था कभी हमारा आज का हिमाचल प्रदेश।

ये Salute और Non - Salute में विभाजित थी। Salute स्टेट उन्हें कहा जाता था जिनके शासकों को ब्रिटिश राज में तोपों से सलामी दी जाती थी , कितनी तोपों की सलामी होगी यह भी तय होता था। हालाँकि सलामी का रुतबा कभी छीन लिया जाता कभी कम कर दिया जाता कभी बढ़ा दिया जाता था।

11 तोपों की सलामी वाली रियासते यह थीं -

केहलूर - वर्तमान बिलासपुर
चम्बा
मंडी
सुकेत - वर्तमान सुंदरनगर रीजन
सिरमौर -नाहन -
उपरोक्त रियासतों में से। सिर्फ़ सिरमौर के शासक को " महाराजा" का टाइटल था बाकियों के " राजा "

इसके अलावा ऐसी भी रियासते थी जीने सलामी तो निहित थी पर 9 तोप की

बुशैहर - शिमला का रामपुर रोडू और वर्तमन का किन्नौर जिला

बाकी Non सलूट रियासते थीं।
कांगड़ा - लंबागांव रियासत - - कांगड़ा , लाहौल स्पीति , कुल्लू
कांगड़ा - नादौन
जसवं
गुलेर -हरिपुर
सिब्बा - डाडा सिब्बा
कुटलैहड़ - वर्तमान ऊना का बंगाणा , रायपुर रीजन
नूरपुर ,

इसके अलावा नॉन सलूट में शिमला हिल स्टेट की निम्नलखित रियासते थीं

बाघल (अर्की) , बाघेट (सोलन रीजन), बलसन (वर्तमान थेओग का कुछ भाग) , बेजा (वर्तमान कसौली का इलाका) , दारकोटि , धामी जुब्बल , क्योंथल (मतियाना रीजन), कुमारसैन, कुनिहार , कुठाड़ (सपाटू रीजन), महलोग (कालका परवाणु के पास का इलाका) , मांगल , हॉण्डुर -, नालागढ़, सांगरी, थरोट

उपरोक्त रियासतों में नालागढ़ केे शासक का टाइटल महाराजा था , वहीँ सांगरी के शासक का मियां बाकी सबके राणा या ठाकुर थे

इनके अलावा छोटी छोटी जागीरदारे थी ,इनके टाइटल जैलदार आदि थे.

2 years ago | [YT] | 3

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2 years ago | [YT] | 4

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हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग भारत के संविधान को न मानकर अपनी हजारों साल पुरानी परंपरा को मानते हैं. पहाड़ियों से घिरे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में है ये छोटा सा गांव ‘मलाणा’.
कहा जाता है कि दुनिया को सबसे पहले लोकतंत्र यहीं से मिला था.

प्राचीन काल में इस गांव में कुछ नियम बनाए गए, इन नियमों को बाद में संसदीय प्रणाली में बदल दिया गया.इस गांव के अपने खुद के दो सदन हैं. एक छोटा सदन और एक बड़ा सदन.
बड़े सदन में कुल 11 सदस्य होते हैं, जिसमें 8 सदस्य गांव वालों में से चुने जाते हैं, जबकि तीन अन्य कारदार, गुर और पुजारी स्थायी सदस्य होते हैंllये गांव वाले जमलू ऋषि को अपना देवता मानते हैं. इन्ही का फैसला सच्चा और अंतिम माना जाता है.

किसी मामले को जमलू देवता के हवाले करने की बाद बहुत ही अजीबो गरीब तरीके से फैसला किया जाता है. जिन दो पक्षों का मामला होता है, उनसे दो बकरे मंगाए जाते हैं.

दोनों ही बकरों की टांग में चीरा लगाकर बराबर मात्रा में जहर भर दिया जाता है. जहर भरने के बाद बकरों के मरने का इंतजार होता है और जिस पक्ष का बकरा पहले मरता है, वह दोषी होता है.
अब इस अंतिम फैसले पर कोई सवाल भी नहीं खड़े कर सकता है, क्योंकि इनका मानना है कि यह फैसला खुद जमलू देवता ने सुनाया हैll यहां साल में एक बार होने वाले ‘फागली’ उत्सव में ये लोग अकबर की पूजा करते हैं.

लोगों की मान्यता है कि बादशाह अकबर ने जमलू ऋषि की परीक्षा लेनी चाही थी, जिसके बाद जमलू ऋषि ने दिल्ली में बर्फबारी करा दी थी. एक दिलचस्प बात और है कि ये लोग खुद को सिकंदर का वंशज बताते हैं.रहस्य से भरे इस गांव में बाहरी लोगों के कुछ भी छूने पर पाबंदी है. इसके लिए इनकी ओर से बकायदा नोटिस भी लगाया गया है, जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि किसी भी चीज को छूने पर एक हजार रुपए का जुर्माना देना होगा.

इनके जुर्माने की रकम 1000 से लेकर 2500 रुपए तक है. किसी भी सामान को छूने की पाबंदी के बावजूद भी यह स्थान पर्यटकों को आकर्षित करता हैlll

2 years ago | [YT] | 4

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गुच्छी एक कवक है जिसके फूलों या बीजकोश के गुच्छों की तरकारी बनती है। यह स्वाद में बेजोड़ और कई औषधियों गुणों से भरपूर है। भारत और नेपाल में स्थानीय भाषा में इसे 'गुच्छी', छतरी, टटमोर या डुंघरू कहा जाता है। गुच्छी चंबा, कुल्लू, शिमला, मनाली सहित हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के जंगलों में पाई जाती है।

Morchella esculenta, (commonly known as common morel, morel, yellow morel, true morel, morel mushroom, and sponge morel) is a species of fungus in the family Morchellaceae of the Ascomycota. It is one of the most readily recognized of all the edible mushrooms and highly sought after. Each fruit body begins as a tightly compressed, grayish sponge with lighter ridges, and expands to form a large yellowish sponge with large pits and ridges raised on a large white stem. The pitted yellow-brown caps measure 2–7 centimetres (1–3 inches) broad by 2–10 cm (1–4 in) tall, and are fused to the stem at its lower margin, forming a continuous hollow. The pits are rounded and irregularly arranged. The hollow stem is typically 2–9 cm (1–3+1⁄2 in) long by 2–5 cm (1–2 in) thick, and white to yellow. The fungus fruits under hardwoods and conifers during a short period in the spring, depending on the weather, and is also associated with old orchards, woods and disturbed grounds.
👆Source Google👆
Chanju Valley......

Chamba

Himachal Pradesh

2 years ago | [YT] | 4