-बदलती दुनियाँ मे बिखरते लम्हों को समेटने की एक कोशिश ।
दूध का सार है मलाई में और जिंदगी का सार है भलाई में
- हंसी खेली रहणु ।
और हाँ -
इंसान के दो ही सच्चे साथी हैं।
एक, अपना किया हुआ कर्म, और
दूसरा, परमात्मा। शेष तो सब
यहीं मिले हैं, और यहीं बिछड़ जाएंगे।
( नेगी जी का ग्रुप म फुल मसलू मिलोलु कोई डिस्काउंट नीच)
In future
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