श्री राजाराम संस्कृत गुरुकुलम् ( वेद- वेदांग , भागवत्, कर्मकाण्ड,ज्योतिष,भारतीय संस्कार) 🧿सस्वर ,सविधि सीखने के लिए संपर्क करे 🧿 आपके बच्चो को श्री राजाराम संस्कृत गुरुकुलम् से 1 घण्टा प्रतिदिन अध्ययन करा के सनातन धर्म की जानकारी , संस्कार,दैनिक पूजन श्लोक ,मंत्र, वैदिक धर्म की सुसंस्कारित शिक्षा प्रदान करा के भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में अपनी आहुति प्रदान कर सकते है ! 🧿आपके बच्चे आधुनिक अध्ययन के साथ अब वैदिक शिक्षा भी सीखेंगे ! 🧿इस अध्ययन से आपके बच्चे संस्कारी, सुशिक्षित , धर्मप्रेमी, धर्म रक्षक, और अपना व अपने भारत की उन्नति के कारण होंगे ‼️
वैदिक अतुल त्रिपाठी श्री राजाराम संस्कृत गुरुकुलम् प्रधान कॉलोनी बुराड़ी दिल्ली 84
भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ चैत्र प्रतिपदा से ही क्यों? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है । आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यावहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है । इसे राष्ट्रीय गौरवशाली परंपरा का प्रतीक माना जाता है । विक्रमी संवत किसी संकुचित विचारधारा या पंथाश्रित नहीं है । हम इसको पंथ निरपेक्ष रूप में देखते हैं । यह संवत्सर किसी देवी, देवता या महान पुरुष के जन्म पर आधारित नहीं, ईस्वी या हिजरी सन की तरह किसी जाति अथवा संप्रदाय विशेष का नहीं है । हमारी गौरवशाली परंपरा विशुद्ध अर्थों में प्रकृति के खगोलशास्त्रीय सिद्धातों पर आधारित है और भारतीय कालगणना का आधार पूर्णतया पंथ निरपेक्ष है । प्रतिपदा का यह शुभ दिन भारत राष्ट्र की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है । ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्रमास के प्रथम दिन ही ब्रह्मा ने सृष्टि संरचना प्रारंभ की । यह भारतीयों की मान्यता है, इसीलिए हम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्षारंभ मानते हैं ।
आज भी हमारे देश में प्रकृति, शिक्षा तथा राजकीय कोष आदि के चालन-संचालन में मार्च, अप्रैल के रूप में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही देखते हैं। यह समय दो ऋतुओं का संधिकाल है। इसमें रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं । प्रकृति नया रूप धर लेती है । प्रतीत होता है कि प्रकृति नवपल्लव धारण कर नव संरचना के लिए ऊर्जस्वित होती है । मानव, पशु-पक्षी, यहां तक कि जड़-चेतन प्रकृति भी प्रमाद और आलस्य को त्याग सचेतन हो जाती है । वसंतोत्सव का भी यही आधार है । इसी समय बर्फ पिघलने लगती है । आमों पर बौर आने लगता है । प्रकृति की हरीतिमा नवजीवन का प्रतीक बनकर हमारे जीवन से जुड़ जाती है ।
इसी प्रतिपदा के दिन आज से 2054 वर्ष पूर्व उज्जयनी नरेश महाराज विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांत शकों से भारत-भू का रक्षण किया और इसी दिन से काल गणना प्रारंभ की । उपकृत राष्ट्र ने भी उन्हीं महाराज के नाम से विक्रमी संवत कह कर पुकारा। महाराज विक्रमादित्य ने आज से 2054 वर्ष पूर्व राष्ट्र को सुसंगठित कर शकों की शक्ति का उन्मूलन कर देश से भगा दिया और उनके ही मूल स्थान अरब में विजयश्री प्राप्त की। साथ ही यवन, हूण, तुषार, पारसिक तथा कंबोज देशों पर अपनी विजय ध्वजा फहराई । उसी के स्मृति स्वरूप यह प्रतिपदा संवत्सर के रूप में मनाई जाती थी और यह क्रम पृथ्वीराज चौहान के समय तक चला । महाराजा विक्रमादित्य ने भारत की ही नहीं, अपितु समस्त विश्व की सृष्टि की । सबसे प्राचीन कालगणना के आधार पर ही प्रतिपदा के दिन को विक्रमी संवत के रूप में अभिषिक्त किया । इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामचंद्र के राज्याभिषेक अथवा रोहण के रूप में मनाया गया । यह दिन ही वास्तव में असत्य पर सत्य की विजय दिलाने वाला है । इसी दिन महाराज युधिष्टिर का भी राज्याभिषेक हुआ और महाराजा विक्रमादित्य ने भी शकों पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया।
आज भी यह दिन हमारे सामाजिक और धाíमक कार्यों के अनुष्ठान की धुरी के रूप में तिथि बनाकर मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने वाला पुण्य दिवस है। हम प्रतिपदा से प्रारंभ कर नौ दिन में छह मास के लिए शक्ति संचय करते हैं, फिर अश्विन मास की नवरात्रि में शेष छह मास के लिए शक्ति संचय करते हैं । वैदिक अतुल त्रिपाठी (काशी) मोबाइल नंबर- 8765034688
वैदिक अतुल त्रिपाठी
कार्तिक माह के कुछ नियम
4 months ago | [YT] | 4
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
श्री राजाराम संस्कृत गुरुकुलम्
( वेद- वेदांग , भागवत्, कर्मकाण्ड,ज्योतिष,भारतीय संस्कार)
🧿सस्वर ,सविधि सीखने के लिए संपर्क करे
🧿 आपके बच्चो को श्री राजाराम संस्कृत गुरुकुलम् से 1 घण्टा प्रतिदिन अध्ययन करा के सनातन धर्म की जानकारी , संस्कार,दैनिक पूजन श्लोक ,मंत्र, वैदिक धर्म की सुसंस्कारित शिक्षा प्रदान करा के भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में अपनी आहुति प्रदान कर सकते है !
🧿आपके बच्चे आधुनिक अध्ययन के साथ अब वैदिक शिक्षा भी सीखेंगे !
🧿इस अध्ययन से आपके बच्चे संस्कारी, सुशिक्षित , धर्मप्रेमी, धर्म रक्षक, और अपना व अपने भारत की उन्नति के कारण होंगे ‼️
वैदिक अतुल त्रिपाठी
श्री राजाराम संस्कृत गुरुकुलम् प्रधान कॉलोनी बुराड़ी दिल्ली 84
9 months ago | [YT] | 11
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
प्राचीन शिव मन्दिर सायं आरती दर्शन 🙏
1 year ago | [YT] | 29
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् 🙏❤
1 year ago | [YT] | 62
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं! हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की।
1 year ago | [YT] | 56
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
इस सावन दिल्ली के प्राचीन शिव मंदिर में कालसर्प योग नाड़ी दोष के विशेष पूजा के लिए संपर्क करें
वैदिक अतुल त्रिपाठी - 8765034688
1 year ago | [YT] | 20
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।
आपको हमारी तरफ से हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं...!!🚩🚩
वैदिक अतुल त्रिपाठी
मोबाइल नंबर -8765034688
🙏 जय सिया राम 🙏
1 year ago | [YT] | 20
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ चैत्र प्रतिपदा से ही क्यों?
〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️
भारतीय नववर्ष का प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही माना जाता है और इसी दिन से ग्रहों, वारों, मासों और संवत्सरों का प्रारंभ गणितीय और खगोल शास्त्रीय संगणना के अनुसार माना जाता है । आज भी जनमानस से जुड़ी हुई यही शास्त्रसम्मत कालगणना व्यावहारिकता की कसौटी पर खरी उतरी है । इसे राष्ट्रीय गौरवशाली परंपरा का प्रतीक माना जाता है । विक्रमी संवत किसी संकुचित विचारधारा या पंथाश्रित नहीं है । हम इसको पंथ निरपेक्ष रूप में देखते हैं । यह संवत्सर किसी देवी, देवता या महान पुरुष के जन्म पर आधारित नहीं, ईस्वी या हिजरी सन की तरह किसी जाति अथवा संप्रदाय विशेष का नहीं है । हमारी गौरवशाली परंपरा विशुद्ध अर्थों में प्रकृति के खगोलशास्त्रीय सिद्धातों पर आधारित है और भारतीय कालगणना का आधार पूर्णतया पंथ निरपेक्ष है । प्रतिपदा का यह शुभ दिन भारत राष्ट्र की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है । ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्रमास के प्रथम दिन ही ब्रह्मा ने सृष्टि संरचना प्रारंभ की । यह भारतीयों की मान्यता है, इसीलिए हम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्षारंभ मानते हैं ।
आज भी हमारे देश में प्रकृति, शिक्षा तथा राजकीय कोष आदि के चालन-संचालन में मार्च, अप्रैल के रूप में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही देखते हैं। यह समय दो ऋतुओं का संधिकाल है। इसमें रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं । प्रकृति नया रूप धर लेती है । प्रतीत होता है कि प्रकृति नवपल्लव धारण कर नव संरचना के लिए ऊर्जस्वित होती है । मानव, पशु-पक्षी, यहां तक कि जड़-चेतन प्रकृति भी प्रमाद और आलस्य को त्याग सचेतन हो जाती है । वसंतोत्सव का भी यही आधार है । इसी समय बर्फ पिघलने लगती है । आमों पर बौर आने लगता है । प्रकृति की हरीतिमा नवजीवन का प्रतीक बनकर हमारे जीवन से जुड़ जाती है ।
इसी प्रतिपदा के दिन आज से 2054 वर्ष पूर्व उज्जयनी नरेश महाराज विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांत शकों से भारत-भू का रक्षण किया और इसी दिन से काल गणना प्रारंभ की । उपकृत राष्ट्र ने भी उन्हीं महाराज के नाम से विक्रमी संवत कह कर पुकारा। महाराज विक्रमादित्य ने आज से 2054 वर्ष पूर्व राष्ट्र को सुसंगठित कर शकों की शक्ति का उन्मूलन कर देश से भगा दिया और उनके ही मूल स्थान अरब में विजयश्री प्राप्त की। साथ ही यवन, हूण, तुषार, पारसिक तथा कंबोज देशों पर अपनी विजय ध्वजा फहराई । उसी के स्मृति स्वरूप यह प्रतिपदा संवत्सर के रूप में मनाई जाती थी और यह क्रम पृथ्वीराज चौहान के समय तक चला । महाराजा विक्रमादित्य ने भारत की ही नहीं, अपितु समस्त विश्व की सृष्टि की । सबसे प्राचीन कालगणना के आधार पर ही प्रतिपदा के दिन को विक्रमी संवत के रूप में अभिषिक्त किया । इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान रामचंद्र के राज्याभिषेक अथवा रोहण के रूप में मनाया गया । यह दिन ही वास्तव में असत्य पर सत्य की विजय दिलाने वाला है । इसी दिन महाराज युधिष्टिर का भी राज्याभिषेक हुआ और महाराजा विक्रमादित्य ने भी शकों पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया।
आज भी यह दिन हमारे सामाजिक और धाíमक कार्यों के अनुष्ठान की धुरी के रूप में तिथि बनाकर मान्यता प्राप्त कर चुका है। यह राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने वाला पुण्य दिवस है। हम प्रतिपदा से प्रारंभ कर नौ दिन में छह मास के लिए शक्ति संचय करते हैं, फिर अश्विन मास की नवरात्रि में शेष छह मास के लिए शक्ति संचय करते हैं ।
वैदिक अतुल त्रिपाठी (काशी)
मोबाइल नंबर- 8765034688
2 years ago | [YT] | 16
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
*दीपावली विशेष....✍️*
*प्रतिष्ठान, दुकान, फैक्ट्री आदि के पूजन का मुहूर्त👇*
*1---* अभिजित् मुहूर्त (दिन में 11-30 से 12-30 के बीच में)
*2---* दिन में 12-50 से 02-24 तक,
*घर (मकान) में पूजन मुहूर्त*
*1---* शाम 04-50 बजे से 07-30 तक,
*2---* रात में 11-50 से 2-10 तक,
*आपको दीपावली की अनेकशः शुभकामनाएँ*
💐💐💐💐💐💐💐
*सप्रेम जय श्री सीताराम*
वैदिक अतुल त्रिपाठी (काशी)
मोबाइल नंबर- 8765034688
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
2 years ago | [YT] | 16
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वैदिक अतुल त्रिपाठी
#धनत्रयोदशी_2023
धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रदोष व्यापिनी काल में मनाया जाता है
धनतेरस 10.11. 2023 दिन शुक्रवार को है
इस दिन सोने चांदी के आभूषण और पीतल और चांदी के बर्तन खरीदना शुभ है।
इसदिन धन की #अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी जी की और #कुबेर भगवान की आराधना और आरोग्यता के लिए #धनवंतरी भगवान की पूजा की जाती है।
#धनतेरस का #मूहूर्त शुक्रवार को दिन में 11.47 के बाद त्रयोदशी आरंभ हो रही है।
चौघड़िया मूहूर्त दिन में #शुभ11.40 से 01.02तक,#चर03.46 से 05.08 तक #लाभ_रात्रि08.24 से 10.02तक है ।
#पुजारी_जी
पूजन का #सर्वश्रेष्ठ #मूहूर्त #स्थिर #वृष_लग्न_सायं05.52से रात्रि 07.48तक है।
इस समय #पूजन और #आरोग्यता के लिए और अपने #कार्यक्षेत्र व #प्रतिष्ठान की #प्रगति व #कार्यालय #फैक्ट्री व दुकान में उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए #लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्ति के लिए #कनकधारा #श्रीसूक्त #दारिद्रदहन #स्त्रोत का पाठ अवश्य करवायें। #हवन के लिए #बेलफल #कमलबीज और घी से लक्ष्मी मंत्र से हवन करवायें।
#कुबेर_पोटली का निर्माण भी इसदिन ही करना #अल्पमृत्यु_निवारण हेतु उपाय में #सायं घर के मुख्य दरवाजे पर #यमराज जी की प्रसन्नता के लिए #दक्षिण दिशा की तरफ तिल के तेल का दीपक जलाकर #यमराज से #अल्पमृत्यु निवारण हेतु प्रार्थना करें।
धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।
वैदिक अतुल त्रिपाठी (काशी)
मोबाइल नंबर- 8765034688
2 years ago | [YT] | 29
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