सभी मसीह भाई एवं बहनों को जय मसीह की हमारे चैनल में आप सभी का स्वागत है। इस चैनल में आप को प्रभु यीशु मसीह के वचनों को बताया जायेगा। जिससे आप प्रभु के वचनों में बढ़ते रहें। प्रभु आप सभी को आशीष दें। जय मसीह की।
📖 आज का वचन “यदि हमारे पास खाने और पहनने को हो, तो इन्हीं पर सन्तोष करना चाहिए।” — 1 तीमुथियुस 6:8
🙏 संदेश: यह वचन हमें सिखाता है कि सच्ची शांति और खुशी वस्तुओं की अधिकता में नहीं, बल्कि सन्तोष में है। आज की दुनिया में हम अक्सर और अधिक पाने की दौड़ में लगे रहते हैं—अधिक धन, बेहतर कपड़े, बड़ा घर। लेकिन परमेश्वर का वचन हमें याद दिलाता है कि यदि हमारी मूल आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं, तो हमें कृतज्ञ होना चाहिए। सन्तोष हमें लालच, तुलना और असंतोष से बचाता है। जब हम अपने पास जो है, उसके लिए धन्यवाद करते हैं, तब हमारा मन हल्का होता है और विश्वास मजबूत होता है। आइए आज यह निर्णय लें कि हम परिस्थितियों में नहीं, बल्कि परमेश्वर की व्यवस्था में भरोसा रखें। सन्तोष से भरा जीवन ही वास्तव में आशीषों से भरा जीवन है। ✨
📖 "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।" – भजन संहिता 37:4
✨ विचार जब हमारा सच्चा आनन्द प्रभु में होता है, तब हमारी इच्छाएँ भी उसकी इच्छा के अनुसार बदल जाती हैं। ऐसे में परमेश्वर न केवल हमें शांति देता है, बल्कि हमारे मन के उचित मनोरथों को भी पूरा करता है।
🙏 प्रार्थना | Prayer "हे प्रभु, मेरा सच्चा सुख तुझ में ही हो। मेरी इच्छाओं को अपनी इच्छा के अनुसार ढाल और उन्हें पूरा कर।"
📖 "तू विश्वास कर, तो परमेश्वर की महिमा देखेगा।" – यूहन्ना 11:40
✨ विचार विश्वास ही वह कुंजी है जो परमेश्वर की सामर्थ और उसकी महिमा को हमारे जीवन में प्रकट करती है। जब हम परिस्थितियों से नहीं, बल्कि विश्वास से चलते हैं — तब चमत्कार होते हैं।
🙏 प्रार्थना | Prayer "हे प्रभु, मुझे ऐसा दृढ़ विश्वास दे कि मैं तेरी महिमा को अपने जीवन में प्रत्यक्ष देख सकूँ।"
यह वचन (यिर्मयाह 29:13) एक अद्भुत सत्य को उजागर करता है — परमेश्वर कोई दूर बैठा हुआ देवता नहीं है जो हमें अनदेखा करता है, बल्कि वह एक सजीव, प्रेमपूर्ण पिता है जो चाहता है कि हम पूरे मन से उसकी खोज करें। वह छिपा नहीं है; वह चाहता है कि हम उसे ढूँढ़ें, ताकि हम वास्तव में उसे पा सकें।
लेकिन ध्यान दें — यहाँ शर्त है: “अपने सम्पूर्ण मन से।” परमेश्वर आधे मन, आधे विश्वास, या केवल औपचारिक प्रार्थनाओं से नहीं मिलता। जब हमारा हृदय पूरी तरह से उसकी ओर झुक जाता है — जब हम संसार के शोर से हटकर, सच्चे मन से उसकी खोज करते हैं — तब वह स्वयं को प्रकट करता है।
जब जीवन में दिशा खो जाए, जब प्रार्थनाएँ सूखी लगें, जब दिल टूट जाए — यही वह क्षण है जब परमेश्वर कहता है, “मुझे ढूँढ़ो, और मैं तुम्हें मिल जाऊँगा।” वह छिपा नहीं है, बस इंतज़ार कर रहा है कि तुम पूरी निष्ठा और प्रेम से उसकी ओर लौटो।
यह वचन हमें आमंत्रण देता है कि हम अपने दिल के हर कोने से, हर इच्छा और हर पीड़ा के साथ, उसके पास आएँ। क्योंकि जब हम सच्चे दिल से परमेश्वर को खोजते हैं — वह हमेशा मिलता है। और जो उसे पा लेता है, वह सब कुछ पा लेता है।
यह वचन (भजन संहिता 139:13-14) हमें हमारे अस्तित्व के सबसे गहरे सत्य से परिचित कराता है—कि हम किसी संयोग से नहीं बने हैं। हम किसी गलती या संयोग का परिणाम नहीं हैं। हमें स्वयं परमेश्वर ने अपने हाथों से रचा है। जब हम अभी हमारी माँ के गर्भ में आकार भी नहीं ले रहे थे, तब भी परमेश्वर हमें जानता था, हमें देख रहा था, और हमारे जीवन के लिए योजना बना रहा था। यह सोच कितनी अद्भुत है कि ब्रह्मांड का सृष्टिकर्ता हमें व्यक्तिगत रूप से जानता है!
आज की दुनिया में लोग अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, खुद को कमतर समझते हैं, आत्म-संदेह में पड़ जाते हैं, और कहते हैं, “मैं कुछ नहीं हूँ”। पर यह वचन हमारी आत्मा में एक दिव्य सत्य बोता है—“तू भययोग्य और अद्भुत रीति से बनाया गया है।” अर्थात्, तुम्हारे अंदर परमेश्वर की कारीगरी है। तुम्हारा व्यक्तित्व, तुम्हारी क्षमताएँ, तुम्हारी आवाज़, तुम्हारा हृदय—सब कुछ जान-बूझकर रचा गया है।
यदि संसार तुम्हें अस्वीकार करे, तो भी याद रखना—परमेश्वर ने तुम्हें चुना है। यदि लोग तुम्हें कम समझें, तो याद रखना—परमेश्वर ने तुम्हें अद्भुत कहा है।
इसलिए अपने सिर को ऊँचा करो। तुम कोई साधारण रचना नहीं—तुम परमेश्वर की अद्भुत कृति हो।
यह वचन (यूहन्ना 6:35) हमारे प्रभु यीशु मसीह के उस दिव्य सत्य को प्रकट करता है जो हर आत्मा की गहराई में छिपी भूख और प्यास को मिटा सकता है। जब यीशु कहते हैं, “जीवन की रोटी मैं हूँ,” वे हमें यह बता रहे हैं कि सच्चा संतोष, सच्ची तृप्ति और सच्ची शांति केवल उन्हीं में है। संसार की रोटियाँ क्षणिक हैं — वे शरीर को तो तृप्त करती हैं, पर आत्मा को नहीं। लेकिन जो यीशु के पास आता है, जो उनके वचन पर विश्वास करता है, उसे कभी आत्मिक भूख या प्यास नहीं लगती।
इस संसार में लोग नाम, धन, सफलता और सुख के पीछे भागते हैं, परंतु अंत में खालीपन ही महसूस करते हैं। क्योंकि यह सब केवल बाहरी संतोष देता है। पर जब हम मसीह को अपने जीवन की रोटी बनाते हैं — जब हम उनके वचनों से, उनके प्रेम से, उनके संगति से भर जाते हैं — तब हमारी आत्मा तृप्त हो जाती है। वह हमें भीतर से बदल देता है, हमारी दिशा सही कर देता है, और जीवन में एक दिव्य उद्देश्य भर देता है।
यीशु केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन का स्रोत हैं। जो उन्हें ग्रहण करता है, वह कभी सूखा नहीं रह सकता। इसलिए आज वह तुम्हें भी बुला रहा है — “मेरे पास आओ!” क्योंकि जो मसीह से जुड़ जाता है, उसे कभी भूख या प्यास नहीं लगती, बल्कि उसमें सदा के जीवन का स्रोत बहने लगता है।
यह वचन (यशायाह 40:11) हमारे प्रभु के कोमल और करुणामय स्वभाव को प्रकट करता है। वह खुद को एक चरवाहे के समान बताता है, जो अपनी भेड़ों की देखभाल करता है। चरवाहा केवल मार्गदर्शन ही नहीं करता, बल्कि सुरक्षा देता है, आहार देता है, और हर भेड़ को व्यक्तिगत रूप से जानता है। उसी तरह हमारा परमेश्वर हमें व्यक्तिगत रूप से जानता है, हमारी हर कमजोरी, हर आवश्यकता और हर बोझ को समझता है।
यहाँ विशेष रूप से कहा गया है कि वह "भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिए रहेगा।" यह उसकी असीमित कोमलता का चित्रण है। जब हम कमजोर होते हैं, डरते हैं, या थक जाते हैं, वह हमें अपनी गोद में उठा लेता है और संभालता है। और जो माताएँ बोझिल हैं, जिन्हें और भी कोमलता की आवश्यकता है, उन्हें वह "धीरे-धीरे" ले चलता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर हमारी गति को जानता है और हमारे साथ उसी के अनुसार चलता है। वह हमें कभी हमारी क्षमता से अधिक नहीं थोपता, बल्कि धीरे-धीरे हमें बढ़ाता और संभालता है।
यह वचन हमें आश्वासन देता है कि हम अकेले नहीं हैं। हमारा चरवाहा हमारे साथ है, हमें मार्गदर्शन कर रहा है, हमारी रक्षा कर रहा है और हमें अपनी बाहों में संभाल रहा है।
आज इस सच्चाई को थाम लो—तुम्हारा चरवाहा तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगा। वह तुम्हें अपनी गोद में लिए आगे बढ़ा रहा है। यही है सच्ची शांति।
यह वचन (यहेजकेल 36:26) परमेश्वर के अद्भुत वादे को प्रकट करता है। वह कहता है, “मैं तुम्हें नया मन दूँगा, तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा; और तुम्हारे शरीर से पत्थर का हृदय निकालकर तुम्हें मांस का हृदय दूँगा।” यह केवल शब्द नहीं, बल्कि एक गहन परिवर्तन का वादा है—भीतर से नया बना देने का आश्वासन।
मनुष्य का हृदय अक्सर कठोर हो जाता है—पाप, स्वार्थ, कटुता और घमंड के कारण। ऐसा हृदय दूसरों की पीड़ा को महसूस नहीं करता, परमेश्वर की आवाज़ को अनसुना कर देता है और अंधकार में भटकता रहता है। लेकिन परमेश्वर हमें ऐसा ही नहीं छोड़ता। वह स्वयं हमारे भीतर हस्तक्षेप करता है और हमारे कठोर, पत्थर जैसे दिल को हटाकर एक कोमल, जीवित और संवेदनशील हृदय देता है—जो प्रेम करना जानता है, क्षमा करना सीखता है और उसकी आत्मा की आवाज़ को पहचानता है।
यह परिवर्तन हमारी कोशिशों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की आत्मा की सामर्थ्य से होता है। जब वह हमें नया मन और नई आत्मा देता है, तब हम पुराने जीवन की जंजीरों से मुक्त होकर नई ज्योति में चलने लगते हैं।
आज इस वचन को थाम लो। चाहे तुम्हारा अतीत कैसा भी रहा हो, परमेश्वर तुम्हें नया बना सकता है। उसका वादा है—“मैं तुम्हें नया मन दूँगा।” यही सच्ची आशा और सच्चा जीवन है।
यह वचन हमें एक अद्भुत और अनन्त सच्चाई की ओर इंगित करता है। यहाँ कहा गया है कि बुद्धिमानों की चमक आकाशमण्डल जैसी होगी और जो बहुतों को धर्मी बनाते हैं, वे तारे की तरह सदा चमकते रहेंगे। इसका अर्थ केवल ज्ञान रखने से नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को जीवन में जीकर और दूसरों को सत्य की राह पर ले जाकर आत्मिक प्रभाव छोड़ना है।
बुद्धिमत्ता केवल दुनियावी चतुराई नहीं है, बल्कि परमेश्वर के भय और उसकी आज्ञाओं का पालन करना ही सच्ची बुद्धि है। जब कोई व्यक्ति अपने जीवन से मसीह की ज्योति को दूसरों के सामने प्रकट करता है और आत्माओं को धर्म के मार्ग पर ले आता है, तब उसका प्रभाव तात्कालिक नहीं रहता, बल्कि अनन्तकाल तक बना रहता है।
तारों की चमक रात के अंधकार को चीर देती है। उसी प्रकार, धर्मी जीवन जीने वाले लोग संसार के अंधकार में प्रकाश फैलाते हैं। वे आशा, प्रेम, और सत्य के जीवित उदाहरण बनते हैं। और परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है कि उनका प्रतिफल केवल पृथ्वी पर ही नहीं, बल्कि अनन्तकाल तक रहेगा।
तो आज इस वचन को अपने हृदय में बसाओ। अपनी बुद्धि और जीवन को इस प्रकार प्रयोग करो कि लोग तुम्हारे द्वारा परमेश्वर की ओर आकर्षित हों। यही वह मार्ग है जो तुम्हें सदा तारों की भाँति चमकने वाला बनाएगा।
Shine Masihi
📖 आज का वचन
“यदि हमारे पास खाने और पहनने को हो, तो इन्हीं पर सन्तोष करना चाहिए।”
— 1 तीमुथियुस 6:8
🙏 संदेश:
यह वचन हमें सिखाता है कि सच्ची शांति और खुशी वस्तुओं की अधिकता में नहीं, बल्कि सन्तोष में है। आज की दुनिया में हम अक्सर और अधिक पाने की दौड़ में लगे रहते हैं—अधिक धन, बेहतर कपड़े, बड़ा घर। लेकिन परमेश्वर का वचन हमें याद दिलाता है कि यदि हमारी मूल आवश्यकताएँ पूरी हो रही हैं, तो हमें कृतज्ञ होना चाहिए। सन्तोष हमें लालच, तुलना और असंतोष से बचाता है। जब हम अपने पास जो है, उसके लिए धन्यवाद करते हैं, तब हमारा मन हल्का होता है और विश्वास मजबूत होता है। आइए आज यह निर्णय लें कि हम परिस्थितियों में नहीं, बल्कि परमेश्वर की व्यवस्था में भरोसा रखें। सन्तोष से भरा जीवन ही वास्तव में आशीषों से भरा जीवन है। ✨
3 weeks ago | [YT] | 39
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Shine Masihi
“नया साल, नई आशा, और यीशु मसीह में नया जीवन — Happy New Year!” ✝️🎉
1 month ago | [YT] | 30
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Shine Masihi
🌿 आज का वचन | Today Scripture
📖 "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।"
– भजन संहिता 37:4
✨ विचार
जब हमारा सच्चा आनन्द प्रभु में होता है, तब हमारी इच्छाएँ भी उसकी इच्छा के अनुसार बदल जाती हैं। ऐसे में परमेश्वर न केवल हमें शांति देता है, बल्कि हमारे मन के उचित मनोरथों को भी पूरा करता है।
🙏 प्रार्थना | Prayer
"हे प्रभु, मेरा सच्चा सुख तुझ में ही हो। मेरी इच्छाओं को अपनी इच्छा के अनुसार ढाल और उन्हें पूरा कर।"
2 months ago | [YT] | 74
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Shine Masihi
🌿 आज का वचन | Today Scripture
📖 "तू विश्वास कर, तो परमेश्वर की महिमा देखेगा।"
– यूहन्ना 11:40
✨ विचार
विश्वास ही वह कुंजी है जो परमेश्वर की सामर्थ और उसकी महिमा को हमारे जीवन में प्रकट करती है। जब हम परिस्थितियों से नहीं, बल्कि विश्वास से चलते हैं — तब चमत्कार होते हैं।
🙏 प्रार्थना | Prayer
"हे प्रभु, मुझे ऐसा दृढ़ विश्वास दे कि मैं तेरी महिमा को अपने जीवन में प्रत्यक्ष देख सकूँ।"
3 months ago | [YT] | 96
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Shine Masihi
यह वचन (यिर्मयाह 29:13) एक अद्भुत सत्य को उजागर करता है — परमेश्वर कोई दूर बैठा हुआ देवता नहीं है जो हमें अनदेखा करता है, बल्कि वह एक सजीव, प्रेमपूर्ण पिता है जो चाहता है कि हम पूरे मन से उसकी खोज करें।
वह छिपा नहीं है; वह चाहता है कि हम उसे ढूँढ़ें, ताकि हम वास्तव में उसे पा सकें।
लेकिन ध्यान दें — यहाँ शर्त है: “अपने सम्पूर्ण मन से।”
परमेश्वर आधे मन, आधे विश्वास, या केवल औपचारिक प्रार्थनाओं से नहीं मिलता। जब हमारा हृदय पूरी तरह से उसकी ओर झुक जाता है — जब हम संसार के शोर से हटकर, सच्चे मन से उसकी खोज करते हैं — तब वह स्वयं को प्रकट करता है।
जब जीवन में दिशा खो जाए, जब प्रार्थनाएँ सूखी लगें, जब दिल टूट जाए — यही वह क्षण है जब परमेश्वर कहता है, “मुझे ढूँढ़ो, और मैं तुम्हें मिल जाऊँगा।”
वह छिपा नहीं है, बस इंतज़ार कर रहा है कि तुम पूरी निष्ठा और प्रेम से उसकी ओर लौटो।
यह वचन हमें आमंत्रण देता है कि हम अपने दिल के हर कोने से, हर इच्छा और हर पीड़ा के साथ, उसके पास आएँ। क्योंकि जब हम सच्चे दिल से परमेश्वर को खोजते हैं —
वह हमेशा मिलता है।
और जो उसे पा लेता है, वह सब कुछ पा लेता है।
3 months ago | [YT] | 52
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Shine Masihi
यह वचन (भजन संहिता 139:13-14) हमें हमारे अस्तित्व के सबसे गहरे सत्य से परिचित कराता है—कि हम किसी संयोग से नहीं बने हैं। हम किसी गलती या संयोग का परिणाम नहीं हैं। हमें स्वयं परमेश्वर ने अपने हाथों से रचा है। जब हम अभी हमारी माँ के गर्भ में आकार भी नहीं ले रहे थे, तब भी परमेश्वर हमें जानता था, हमें देख रहा था, और हमारे जीवन के लिए योजना बना रहा था। यह सोच कितनी अद्भुत है कि ब्रह्मांड का सृष्टिकर्ता हमें व्यक्तिगत रूप से जानता है!
आज की दुनिया में लोग अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, खुद को कमतर समझते हैं, आत्म-संदेह में पड़ जाते हैं, और कहते हैं, “मैं कुछ नहीं हूँ”। पर यह वचन हमारी आत्मा में एक दिव्य सत्य बोता है—“तू भययोग्य और अद्भुत रीति से बनाया गया है।” अर्थात्, तुम्हारे अंदर परमेश्वर की कारीगरी है। तुम्हारा व्यक्तित्व, तुम्हारी क्षमताएँ, तुम्हारी आवाज़, तुम्हारा हृदय—सब कुछ जान-बूझकर रचा गया है।
यदि संसार तुम्हें अस्वीकार करे, तो भी याद रखना—परमेश्वर ने तुम्हें चुना है।
यदि लोग तुम्हें कम समझें, तो याद रखना—परमेश्वर ने तुम्हें अद्भुत कहा है।
इसलिए अपने सिर को ऊँचा करो।
तुम कोई साधारण रचना नहीं—तुम परमेश्वर की अद्भुत कृति हो।
3 months ago | [YT] | 71
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Shine Masihi
यह वचन (यूहन्ना 6:35) हमारे प्रभु यीशु मसीह के उस दिव्य सत्य को प्रकट करता है जो हर आत्मा की गहराई में छिपी भूख और प्यास को मिटा सकता है। जब यीशु कहते हैं, “जीवन की रोटी मैं हूँ,” वे हमें यह बता रहे हैं कि सच्चा संतोष, सच्ची तृप्ति और सच्ची शांति केवल उन्हीं में है। संसार की रोटियाँ क्षणिक हैं — वे शरीर को तो तृप्त करती हैं, पर आत्मा को नहीं। लेकिन जो यीशु के पास आता है, जो उनके वचन पर विश्वास करता है, उसे कभी आत्मिक भूख या प्यास नहीं लगती।
इस संसार में लोग नाम, धन, सफलता और सुख के पीछे भागते हैं, परंतु अंत में खालीपन ही महसूस करते हैं। क्योंकि यह सब केवल बाहरी संतोष देता है। पर जब हम मसीह को अपने जीवन की रोटी बनाते हैं — जब हम उनके वचनों से, उनके प्रेम से, उनके संगति से भर जाते हैं — तब हमारी आत्मा तृप्त हो जाती है। वह हमें भीतर से बदल देता है, हमारी दिशा सही कर देता है, और जीवन में एक दिव्य उद्देश्य भर देता है।
यीशु केवल भोजन नहीं, बल्कि जीवन का स्रोत हैं। जो उन्हें ग्रहण करता है, वह कभी सूखा नहीं रह सकता। इसलिए आज वह तुम्हें भी बुला रहा है — “मेरे पास आओ!” क्योंकि जो मसीह से जुड़ जाता है, उसे कभी भूख या प्यास नहीं लगती, बल्कि उसमें सदा के जीवन का स्रोत बहने लगता है।
4 months ago | [YT] | 57
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Shine Masihi
यह वचन (यशायाह 40:11) हमारे प्रभु के कोमल और करुणामय स्वभाव को प्रकट करता है। वह खुद को एक चरवाहे के समान बताता है, जो अपनी भेड़ों की देखभाल करता है। चरवाहा केवल मार्गदर्शन ही नहीं करता, बल्कि सुरक्षा देता है, आहार देता है, और हर भेड़ को व्यक्तिगत रूप से जानता है। उसी तरह हमारा परमेश्वर हमें व्यक्तिगत रूप से जानता है, हमारी हर कमजोरी, हर आवश्यकता और हर बोझ को समझता है।
यहाँ विशेष रूप से कहा गया है कि वह "भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिए रहेगा।" यह उसकी असीमित कोमलता का चित्रण है। जब हम कमजोर होते हैं, डरते हैं, या थक जाते हैं, वह हमें अपनी गोद में उठा लेता है और संभालता है। और जो माताएँ बोझिल हैं, जिन्हें और भी कोमलता की आवश्यकता है, उन्हें वह "धीरे-धीरे" ले चलता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर हमारी गति को जानता है और हमारे साथ उसी के अनुसार चलता है। वह हमें कभी हमारी क्षमता से अधिक नहीं थोपता, बल्कि धीरे-धीरे हमें बढ़ाता और संभालता है।
यह वचन हमें आश्वासन देता है कि हम अकेले नहीं हैं। हमारा चरवाहा हमारे साथ है, हमें मार्गदर्शन कर रहा है, हमारी रक्षा कर रहा है और हमें अपनी बाहों में संभाल रहा है।
आज इस सच्चाई को थाम लो—तुम्हारा चरवाहा तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगा। वह तुम्हें अपनी गोद में लिए आगे बढ़ा रहा है। यही है सच्ची शांति।
4 months ago | [YT] | 31
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Shine Masihi
यह वचन (यहेजकेल 36:26) परमेश्वर के अद्भुत वादे को प्रकट करता है। वह कहता है, “मैं तुम्हें नया मन दूँगा, तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूँगा; और तुम्हारे शरीर से पत्थर का हृदय निकालकर तुम्हें मांस का हृदय दूँगा।” यह केवल शब्द नहीं, बल्कि एक गहन परिवर्तन का वादा है—भीतर से नया बना देने का आश्वासन।
मनुष्य का हृदय अक्सर कठोर हो जाता है—पाप, स्वार्थ, कटुता और घमंड के कारण। ऐसा हृदय दूसरों की पीड़ा को महसूस नहीं करता, परमेश्वर की आवाज़ को अनसुना कर देता है और अंधकार में भटकता रहता है। लेकिन परमेश्वर हमें ऐसा ही नहीं छोड़ता। वह स्वयं हमारे भीतर हस्तक्षेप करता है और हमारे कठोर, पत्थर जैसे दिल को हटाकर एक कोमल, जीवित और संवेदनशील हृदय देता है—जो प्रेम करना जानता है, क्षमा करना सीखता है और उसकी आत्मा की आवाज़ को पहचानता है।
यह परिवर्तन हमारी कोशिशों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की आत्मा की सामर्थ्य से होता है। जब वह हमें नया मन और नई आत्मा देता है, तब हम पुराने जीवन की जंजीरों से मुक्त होकर नई ज्योति में चलने लगते हैं।
आज इस वचन को थाम लो। चाहे तुम्हारा अतीत कैसा भी रहा हो, परमेश्वर तुम्हें नया बना सकता है। उसका वादा है—“मैं तुम्हें नया मन दूँगा।” यही सच्ची आशा और सच्चा जीवन है।
4 months ago | [YT] | 34
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Shine Masihi
यह वचन हमें एक अद्भुत और अनन्त सच्चाई की ओर इंगित करता है। यहाँ कहा गया है कि बुद्धिमानों की चमक आकाशमण्डल जैसी होगी और जो बहुतों को धर्मी बनाते हैं, वे तारे की तरह सदा चमकते रहेंगे। इसका अर्थ केवल ज्ञान रखने से नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को जीवन में जीकर और दूसरों को सत्य की राह पर ले जाकर आत्मिक प्रभाव छोड़ना है।
बुद्धिमत्ता केवल दुनियावी चतुराई नहीं है, बल्कि परमेश्वर के भय और उसकी आज्ञाओं का पालन करना ही सच्ची बुद्धि है। जब कोई व्यक्ति अपने जीवन से मसीह की ज्योति को दूसरों के सामने प्रकट करता है और आत्माओं को धर्म के मार्ग पर ले आता है, तब उसका प्रभाव तात्कालिक नहीं रहता, बल्कि अनन्तकाल तक बना रहता है।
तारों की चमक रात के अंधकार को चीर देती है। उसी प्रकार, धर्मी जीवन जीने वाले लोग संसार के अंधकार में प्रकाश फैलाते हैं। वे आशा, प्रेम, और सत्य के जीवित उदाहरण बनते हैं। और परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है कि उनका प्रतिफल केवल पृथ्वी पर ही नहीं, बल्कि अनन्तकाल तक रहेगा।
तो आज इस वचन को अपने हृदय में बसाओ। अपनी बुद्धि और जीवन को इस प्रकार प्रयोग करो कि लोग तुम्हारे द्वारा परमेश्वर की ओर आकर्षित हों। यही वह मार्ग है जो तुम्हें सदा तारों की भाँति चमकने वाला बनाएगा।
4 months ago | [YT] | 27
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