पुराने तक्षकलोक के गहरे वन में एक रहस्यमयी तपस्वी रहते थे — वेदाचार्य। उनके बारे में कहा जाता था कि वो भविष्य को पढ़ सकते हैं और पुरातन मन्त्रों से समय की धारा मोड़ सकते हैं।
एक दिन, नागराज को एक भयानक पूर्वाभास हुआ — उसकी शक्ति का स्त्रोत, "नाग-मणि", खतरे में था। उसने तुरंत वेदाचार्य की शरण ली।
वेदाचार्य ध्यान में बैठे, और बोले, "तुम्हारी विरासत पर एक अज्ञात अंधकार मंडरा रहा है। केवल 'त्रिकाल-सूत्र' ही इस संकट को रोक सकता है, लेकिन उसका रहस्य समय में छुपा है।"
नागराज ने पूछा, "मैं क्या करूँ, गुरुदेव?"
वेदाचार्य ने मुस्कराकर उत्तर दिया, "तुम्हें अपने भीतर के भय से लड़ना होगा। मैं तुम्हारे मार्ग को ऊर्जा दूँगा, पर चलना तुम्हें होगा।"
नागराज ने साहस के साथ उस रहस्यपूर्ण यात्रा की शुरुआत की। हर मोड़ पर वेदाचार्य की शिक्षाएँ उसे मार्गदर्शन देती रहीं। अंततः, नागराज ने न केवल नाग-मणि को सुरक्षित किया, बल्कि उस अंधकार का मूल कारण भी नष्ट कर दिया।
वापस लौटकर वह वेदाचार्य के चरणों में झुका। वेदाचार्य बोले, "तुम अब केवल रक्षक नहीं, उत्तराधिकारी हो। नागलोक की शक्ति और ज्ञान अब तुम्हारे हाथों में है।"
और यहीं से शुरू हुआ एक नया अध्याय — नागराज का, और उस रहस्यमयी गुरु का, जो समय की सिलवटों में भविष्य बुनता था — वेदाचार्य।