‘नई धारा’ एक द्विमासिक पत्रिका है, जिसका प्रकाशन अप्रैल, 1950 से निरंतर हो रहा है। ‘नई धारा’ अपने समय और संस्कृति की प्रगतिशील चेतना से रचनात्मक संवाद का साहित्यिक दस्तावेज़ है, जिसकी विकास यात्रा भारत की साहित्यिक पत्रकारिता के समानान्तर रही और जिसके प्रेरणास्रोत राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी, आचार्य शिवपूजन सहाय, उदयराज सिंह आदि रहे।
'नई धारा' अब एक डिजिटल स्वरुप में भी प्रस्तुत है। एक उत्तम व सरल ऑनलाइन प्लेटफार्म के रूप में 'नई धारा' वेबसाइट साहित्य प्रेमियों को हिंदी की उत्कृष्ट रचनाओं और उनके लेखकों से जोड़ने का काम करेगी। इसके अलावा 'नई धारा' सभी प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर भी उपलब्ध है और विभिन्न प्रकार की मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों द्वारा हिंदी साहित्य के सौंदर्य को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
Nayi Dhara
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू साहित्य के कवि और प्रगतिशील लेखक आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में थे। फ़ैज़ की कविताएँ प्रेम, क्रांति, अन्याय के विरोध और मानवता के पक्ष में गहरी संवेदना से भरी हैं। उन्होंने उर्दू शायरी में सामाजिक और राजनीतिक चेतना को नई दिशा दी। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में “नक़्श-ए-फ़रियादी”, “दस्त-ए-सबा” और “ज़िन्दान-नामा” शामिल हैं। फ़ैज़ ने अपनी कविताओं में प्रेम और विद्रोह को एक साथ जोड़ा, जहाँ इश्क़ व्यक्तिगत भी है और सामाजिक भी। कालांतर में फ़ैज़ को लेनिन पीस प्राइज़ से सम्मानित किया गया।
2 days ago | [YT] | 59
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Nayi Dhara
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ आयरलैंड के प्रसिद्ध नाटककार, आलोचक और विचारक थे। वे अंग्रेज़ी साहित्य के सबसे प्रभावशाली नाटककारों में गिने जाते हैं। उनके नाटकों में समाज की कुरीतियों, वर्गभेद और नैतिक पाखंड पर तीखा व्यंग्य मिलता है। Pygmalion, Man and Superman और Saint Joan उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्होंने साहित्य के माध्यम से सामाजिक सुधार और बौद्धिक जागरूकता को बढ़ावा दिया। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 1925 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2 days ago | [YT] | 66
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Nayi Dhara
आज मिर्ज़ा ग़ालिब की बरसी है। वह शायर जिसने उर्दू शायरी को दर्शन से सींचने का काम किया और ऐसी ज़मीन तैयार की कि आने वाली कई नस्लें उस ज़मीन पर अपनी शायरी की फ़स्ल उगाई। मिर्ज़ा ग़ालिब केवल उर्दू के ही शायर नहीं रहे बल्कि उनकी शायरी का देश-दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद किया गया। वे सदैव हमारे प्रिय शायरों में रहेंगे। उन्हें नमन!
2 days ago | [YT] | 58
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Nayi Dhara
आज बशीर बद्र साहब का जन्मदिन है। उन्हें अशेष शुभकामनाएँ। उनकी शायरी के साथ-साथ पढ़िए ये क़िस्सा- नैनीताल क्लब में एक मुशायरा आयोजित था, जिसकी निज़ामत जनाब कँवर महिन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’ कर रहे थे। कार्यक्रम के समापन पर जब केवल बशीर बद्र और वसीम बरेलवी के पढ़ने की बारी शेष रह गई, तो उन्होंने दोनों के प्रति अपने स्नेह को व्यक्त करते हुए कहा,
“ये मेरी दोनों आँखें हैं—मैं पहले किसे बुलाऊँ और बाद में किसे?”
यह सुनकर बशीर बद्र स्वयं उठकर माइक तक पहुँचे और मुस्कुराते हुए कहा,
“मुझे बेहद अफ़सोस है कि अब जनाब कँवर साहब एक आँख से महरूम हो रहे हैं।”
2 days ago | [YT] | 67
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Nayi Dhara
बुक क्लब में हम जिस अगली किताब की चर्चा करेंगे वह है 'अपनी धुन में', जिसके लेखक है रस्किन बॉन्ड।
दिनांक: 22 फ़रवरी (रविवार)
समय: दोपहर 12 बजे
यह किताब पढ़ना शुरू करते हैं।
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रेजिस्ट्रेशन लिंक : forms.gle/YagTpTfxj5Ndy5ht8
6 days ago | [YT] | 27
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Nayi Dhara
बाबुषा कोहली समकालीन हिंदी की प्रमुख कवि और गद्यकार हैं, जिनकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। उनकी कविताएँ अपनी संवेदनशीलता, प्रेम, रहस्य, नए बिंबों और कल्पनाशीलता के लिए विशेष रूप से सराही जाती हैं। वे नई पीढ़ी की महत्वपूर्ण स्त्री-स्वर वाली कवयित्रियों में गिनी जाती हैं। उनके पहले कविता-संग्रह “प्रेम गिलहरी दिल अखरोट” को भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार के साथ प्रकाशित किया गया। उनका गद्य-संग्रह “बावन चिट्ठियाँ” भी काफी चर्चित रहा है। वे एक प्रशिक्षित नृत्यांगना, अध्यापिका और लघु फिल्मों की निर्देशक भी हैं।
6 days ago | [YT] | 56
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Nayi Dhara
औद्योगिक समाज की विसंगतियों और ग़रीबों के जीवन को अपने लेखन में स्थान देने वाले चार्ल्स डिकेन्स का जन्म 7 फ़रवरी 1812 को इंग्लैंड में हुआ था। वे उन्नीसवीं सदी के महान अंग्रेज़ी उपन्यासकार थे, जिन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से सामाजिक अन्याय, बाल श्रम और वर्ग-विभाजन की कठोर सच्चाइयों को उजागर किया। ओलिवर ट्विस्ट, डेविड कॉपरफ़ील्ड, हार्ड टाइम्स और ए टेल ऑफ़ टू सिटीज़ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उनके उपन्यासों में मानवीय संवेदना और सामाजिक आलोचना का गहरा मेल मिलता है। डिकेन्स ने साहित्य को समाज के वंचित और उपेक्षित वर्ग की आवाज़ बनाया।
6 days ago | [YT] | 30
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Nayi Dhara
जब प्रेम का इज़हार करेंगे / हेमंत देवलेकर
जब प्रेम का इज़हार करेंगे हम
हमारी कोई भी महान उपलब्धि
काम नहीं आएगी
काम आएगा सिर्फ़
स्त्री के क़दमों में बैठ
काँपते हाथों से फूल देना
उसकी उत्सुकता फूल में नहीं
हमारे अहं शून्य विनय में होगी
वह देखेगी कितने शालीन होते हैं पुरुष के हाथ
और बच्चे की तरह कितने भोले
हमारी आँखों की पुतलियों में उभर आई
जीने की उत्कट इच्छा में
अपनी ज़िंदगी को तलाशते हुए
थरथराएगा उसके होंठों का लाल रंग
उसका फूल लेना
पूँछ की तरह चिपके हमारे इतिहास को काट देता है
उस क्षण से हम होना शुरू होते हैं
6 days ago | [YT] | 37
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Nayi Dhara
विष्णु खरे हिन्दी के ऐसे कवि और चिंतक थे, जिन्होंने साहित्य को बौद्धिक हस्तक्षेप का ज़रिया माना। उनका जन्म 9 फ़रवरी 1940 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उनकी कविताएँ इतिहास, राजनीति और समकालीन समाज के साथ सीधे संवाद करती हैं और स्थापित मान्यताओं पर प्रश्न उठाती हैं। वे लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे और साहित्यिक आलोचना में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण विदेशी कृतियों का हिन्दी में अनुवाद किया, जिससे हिन्दी साहित्य का दायरा व्यापक हुआ।
6 days ago | [YT] | 36
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Nayi Dhara
ऋतुराज समकालीन हिन्दी के समादृत कवि हैं, जिनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में मैं आंगिरस, एक मरणधर्मा और अन्य, पुल पर पानी, आशा नाम नदी और स्त्रीवग्ग विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनकी कविताएँ स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में भी शामिल की गई हैं। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें सुधींद्र सम्मान, मीराँ सम्मान और सुब्रह्मण्य भारती हिंदीसेवी सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है।
6 days ago | [YT] | 35
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