‘नई धारा’ एक द्विमासिक पत्रिका है, जिसका प्रकाशन अप्रैल, 1950 से निरंतर हो रहा है। ‘नई धारा’ अपने समय और संस्कृति की प्रगतिशील चेतना से रचनात्मक संवाद का साहित्यिक दस्तावेज़ है, जिसकी विकास यात्रा भारत की साहित्यिक पत्रकारिता के समानान्तर रही और जिसके प्रेरणास्रोत राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी, आचार्य शिवपूजन सहाय, उदयराज सिंह आदि रहे।
'नई धारा' अब एक डिजिटल स्वरुप में भी प्रस्तुत है। एक उत्तम व सरल ऑनलाइन प्लेटफार्म के रूप में 'नई धारा' वेबसाइट साहित्य प्रेमियों को हिंदी की उत्कृष्ट रचनाओं और उनके लेखकों से जोड़ने का काम करेगी। इसके अलावा 'नई धारा' सभी प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर भी उपलब्ध है और विभिन्न प्रकार की मल्टीमीडिया प्रस्तुतियों द्वारा हिंदी साहित्य के सौंदर्य को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
Nayi Dhara
ख़ालिद हुसैनी अफ़ग़ान-अमेरिकी उपन्यासकार हैं। वे अपने मार्मिक और मानवीय संवेदना से भरपूर उपन्यासों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। उनका पहला उपन्यास “The Kite Runner” अत्यंत लोकप्रिय हुआ और कई भाषाओं में अनूदित किया गया। इसके अतिरिक्त “A Thousand Splendid Suns” और “And the Mountains Echoed” उनके प्रमुख उपन्यास हैं। उनकी रचनाओं में युद्ध, विस्थापन, स्मृति और मानवीय संबंधों की जटिलताओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के साथ भी कार्य किया है और शरणार्थियों के जीवन पर विशेष ध्यान दिया है।
1 day ago | [YT] | 67
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अरुण देव समकालीन हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि, अनुवादक और संपादक हैं। वे हिन्दी की नई पीढ़ी के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनके प्रमुख कविता-संग्रहों में “कोई तो जगह हो” और “क्या तो समय” उल्लेखनीय हैं। उनकी कविताओं में आधुनिक जीवन, स्मृति, समय और मनुष्य की आंतरिक संवेदनाओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। उन्होंने विश्व कविता के अनेक महत्वपूर्ण रचनाकारों का हिन्दी में अनुवाद भी किया है और साहित्यिक संपादन के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है।
1 day ago | [YT] | 50
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आरज़ू लखनवी (सैयद अनवर हुसैन) लखनऊ की क्लासिकी ग़ज़ल परंपरा के प्रमुख प्रतिनिधियों में हैं। उनकी शायरी में भाषा की सादगी, भावों की कोमलता और अभिव्यक्ति की गरिमा विशेष रूप से दिखाई देती है। उन्होंने परंपरागत उर्दू शायरी की शैली को बनाए रखते हुए उसमें आधुनिक संवेदनाओं को भी स्थान दिया। उनकी ग़ज़लों में प्रेम, विरह, मानवीय अनुभव और आंतरिक भावनाओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। वे प्रारंभिक हिन्दी-उर्दू सिनेमा से भी जुड़े और गीत लेखन के माध्यम से अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराई।
1 day ago | [YT] | 32
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कृष्णा सोबती का जन्म आज ही के दिन 18 फरवरी 1925 को गुजरात (अब पाकिस्तान में) हुआ। वे हिन्दी कथा-साहित्य में अपनी विशिष्ट भाषा, सशक्त स्त्री-पात्रों और स्वतंत्र लेखन के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाओं में स्त्री-अस्मिता, सामाजिक संरचना और मानवीय संबंधों का गहन और यथार्थपूर्ण चित्रण मिलता है। उन्होंने हिन्दी गद्य को नए मुहावरे, बोलचाल की जीवंतता और क्षेत्रीय संवेदना से समृद्ध किया। उनके प्रमुख उपन्यासों में मित्रो मरजानी, ज़िन्दगीनामा, डार से बिछुड़ी और दिल-ओ-दानिश शामिल हैं। ज़िन्दगीनामा के लिए उन्हें 1980 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। बाद में उन्हें हिन्दी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार (2017) से भी सम्मानित किया गया।
1 day ago | [YT] | 82
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नामवर सिंह ने हिन्दी साहित्य की आलोचना को अकादमिक दायरे से निकालकर जीवंत बौद्धिक बहस का रूप दिया। उनके लेखन और व्याख्यानों में मार्क्सवादी दृष्टि, इतिहासबोध और सामाजिक संदर्भों की गहरी समझ दिखाई देती है।"छायावाद", "कविता के नए प्रतिमान" और "दूसरी परंपरा की खोज" जैसी कृतियों के माध्यम से उन्होंने साहित्य को नए ढंग से पढ़ने की दृष्टि दी। हिन्दी आलोचना पर उनकी छाप आज भी बनी हुई है।
1 day ago | [YT] | 25
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ख़ुमार बाराबंकवी उर्दू शायरी की उस रिवायत के शायर थे जहाँ एहसास सबसे ऊपर होता है। उनकी शायरी में न ज़्यादा अलंकार हैं, न ज़रूरत से ज़्यादा तिलिस्म, बस सादा, साफ़ और दिल को छू लेने वाली बात। इश्क़, जुदाई, शराब और तन्हाई उनके यहाँ किसी दिखावे के लिए नहीं आते, बल्कि ज़िंदगी के तजुर्बों की तरह सामने आते हैं। वे तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े रहे, लेकिन उनकी शायरी नारेबाज़ी से दूर रहकर इंसान के अंदरूनी सच को पकड़ती है। ख़ुमार साहब के लफ़्ज़ों में एक ख़ास ठहराव है उनकी ग़ज़लें पढ़ते हुए लगता है जैसे कोई थका हुआ मगर सच्चा इंसान अपनी हार, अपनी मोहब्बत और अपनी उम्मीद बिना शिकवे के बयान कर रहा हो। यही सादगी और सच्चाई उन्हें भीड़ से अलग करती है।
1 day ago | [YT] | 28
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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू साहित्य के कवि और प्रगतिशील लेखक आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में थे। फ़ैज़ की कविताएँ प्रेम, क्रांति, अन्याय के विरोध और मानवता के पक्ष में गहरी संवेदना से भरी हैं। उन्होंने उर्दू शायरी में सामाजिक और राजनीतिक चेतना को नई दिशा दी। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में “नक़्श-ए-फ़रियादी”, “दस्त-ए-सबा” और “ज़िन्दान-नामा” शामिल हैं। फ़ैज़ ने अपनी कविताओं में प्रेम और विद्रोह को एक साथ जोड़ा, जहाँ इश्क़ व्यक्तिगत भी है और सामाजिक भी। कालांतर में फ़ैज़ को लेनिन पीस प्राइज़ से सम्मानित किया गया।
6 days ago | [YT] | 66
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Nayi Dhara
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ आयरलैंड के प्रसिद्ध नाटककार, आलोचक और विचारक थे। वे अंग्रेज़ी साहित्य के सबसे प्रभावशाली नाटककारों में गिने जाते हैं। उनके नाटकों में समाज की कुरीतियों, वर्गभेद और नैतिक पाखंड पर तीखा व्यंग्य मिलता है। Pygmalion, Man and Superman और Saint Joan उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्होंने साहित्य के माध्यम से सामाजिक सुधार और बौद्धिक जागरूकता को बढ़ावा दिया। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 1925 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
6 days ago | [YT] | 67
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Nayi Dhara
आज मिर्ज़ा ग़ालिब की बरसी है। वह शायर जिसने उर्दू शायरी को दर्शन से सींचने का काम किया और ऐसी ज़मीन तैयार की कि आने वाली कई नस्लें उस ज़मीन पर अपनी शायरी की फ़स्ल उगाई। मिर्ज़ा ग़ालिब केवल उर्दू के ही शायर नहीं रहे बल्कि उनकी शायरी का देश-दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद किया गया। वे सदैव हमारे प्रिय शायरों में रहेंगे। उन्हें नमन!
6 days ago | [YT] | 58
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Nayi Dhara
आज बशीर बद्र साहब का जन्मदिन है। उन्हें अशेष शुभकामनाएँ। उनकी शायरी के साथ-साथ पढ़िए ये क़िस्सा- नैनीताल क्लब में एक मुशायरा आयोजित था, जिसकी निज़ामत जनाब कँवर महिन्द्र सिंह बेदी ‘सहर’ कर रहे थे। कार्यक्रम के समापन पर जब केवल बशीर बद्र और वसीम बरेलवी के पढ़ने की बारी शेष रह गई, तो उन्होंने दोनों के प्रति अपने स्नेह को व्यक्त करते हुए कहा,
“ये मेरी दोनों आँखें हैं—मैं पहले किसे बुलाऊँ और बाद में किसे?”
यह सुनकर बशीर बद्र स्वयं उठकर माइक तक पहुँचे और मुस्कुराते हुए कहा,
“मुझे बेहद अफ़सोस है कि अब जनाब कँवर साहब एक आँख से महरूम हो रहे हैं।”
6 days ago | [YT] | 70
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