Radhe Kishori ji

Bhagwan ke Bhajan


Radhe Kishori ji

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5 months ago | [YT] | 1

Radhe Kishori ji

वफादारी और बलिदान से भरा महाराणा प्रताप के चेतक की कहानी || Chetak | Maharana pratap

महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के एक वीर और स्वाभिमानी राजा थे। वे मेवाड़ के शासक थे और उनका जीवन त्याग, बलिदान और स्वतंत्रता की भावना से भरा हुआ था। उनके साथ एक ऐसा घोड़ा था, जिसका नाम था चेतक। चेतक न केवल एक घोड़ा था, बल्कि महाराणा प्रताप का परम साथी और युद्ध का वीर योद्धा भी था।

चेतक एक सुंदर नीले रंग का घोड़ा था, जिसकी चाल इतनी तेज थी कि दुश्मन उसे देखकर घबरा जाते थे। कहा जाता है कि चेतक आम घोड़ों से बहुत अलग था — उसमें बुद्धि, वफादारी और साहस का अद्भुत संगम था।

1576 में हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध हुआ, जिसमें महाराणा प्रताप और अकबर की मुगल सेना आमने-सामने थीं। अकबर की सेना बड़ी और सुसज्जित थी, लेकिन महाराणा प्रताप ने कभी हार नहीं मानी। इस युद्ध में चेतक ने अपनी बहादुरी का ऐसा परिचय दिया, जो इतिहास में अमर हो गया।

युद्ध के दौरान चेतक ने प्रताप को पीठ पर बैठाकर कई दुश्मनों से लड़ाई की। उसने एक हाथी के मस्तक पर छलांग लगाकर प्रताप को शत्रु के पास पहुँचाया ताकि वे हमला कर सकें। लेकिन इसी दौरान चेतक बुरी तरह घायल हो गया। उसके एक पैर में गंभीर चोट आई थी।

हालांकि चेतक घायल था, फिर भी उसने हार नहीं मानी। वह महाराणा प्रताप को युद्ध के मैदान से दूर सुरक्षित स्थान तक ले गया। अंतिम समय तक चेतक दौड़ता रहा, जब तक कि वह एक नदी पार कर के महाराणा प्रताप को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुँचा दिया। इसके बाद चेतक ने अंतिम सांस ली।

चेतक का बलिदान भारतीय इतिहास की सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक घटनाओं में से एक माना जाता है। उसकी वफादारी, साहस और समर्पण ने उसे अमर बना दिया। आज भी चेतक की स्मृति में हल्दीघाटी में एक स्मारक बना हुआ है, जिसे चेतक समाधि कहा जाता है।

महाराणा प्रताप और चेतक की यह कहानी सिर्फ राजा और घोड़े की नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और देशभक्ति की मिसाल है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चे साथी हर हाल में साथ निभाते हैं, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

7 months ago | [YT] | 1